Central Vista Library को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने खास तौर पर पूछा है कि मौजूदा लाइब्रेरी कलेक्शन के लिए प्रस्तावित नई सुविधा में कितनी जगह तय की गई है। कोर्ट ने केंद्र को तीन हफ्ते के भीतर इस संबंध में जानकारी देने को कहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के आरके पुरम में रखी करीब दो लाख किताबों का भी जिक्र किया। अदालत के मुताबिक ये किताबें कार्टन में पैक हैं और 2011 से खोली नहीं गई हैं। कोर्ट ने नई लाइब्रेरी में इस मौजूदा कलेक्शन को रखने की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।
केंद्र से मांगी गई साफ जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मौजूदा लाइब्रेरी कलेक्शन के आकार और प्रस्तावित नई लाइब्रेरी में किताबों के लिए तय जगह की स्पष्ट जानकारी मांगी है। केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। कोर्ट ने उनसे यह भी पूछा कि प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर में लाइब्रेरी और उसके मौजूदा किताबों के कलेक्शन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी या नहीं।
2011 से कार्टन में बंद हैं करीब 2 लाख किताबें
सुनवाई में अदालत का ध्यान खास तौर पर आरके पुरम में रखी किताबों की ओर गया। कोर्ट ने कहा कि करीब दो लाख किताबें कार्टन में पैक करके रखी गई हैं और वर्ष 2011 से उन्हें खोला तक नहीं गया है। यही वजह है कि अदालत नई लाइब्रेरी की योजना में मौजूदा कलेक्शन के लिए पर्याप्त जगह को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहती है।
कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरी सुविधाओं पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के लिए तय जगह का असर लाइब्रेरी कलेक्शन के लिए उपलब्ध स्थान पर पड़ेगा या नहीं। अदालत ने इसी संबंध में केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील को बनाया मददगार
मामले की जांच में अदालत की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील हरि प्रिया पद्मनाभन को भी नियुक्त किया है। अब केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर लाइब्रेरी की प्रस्तावित व्यवस्था, मौजूदा कलेक्शन के आकार और किताबों के लिए तय जगह से जुड़ी जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अदालत की लाइब्रेरी व्यवस्था और उसके बड़े पुस्तक संग्रह से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।



