कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खुद को हनुमान बताने वाले चिराग पासवान अब उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी अलग राजनीतिक पहचान को विस्तार देने की तैयारी में हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है और पार्टी सभी 403 सीटों पर संगठन तथा चुनावी तैयारी का दावा कर रही है। चिराग ने यह भी साफ किया है कि गठबंधन हुआ तो गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो अकेले मैदान में उतरने के लिए भी तैयार हैं।
मोदी के हनुमान से ‘अपनी पार्टी के नेता’ तक
चिराग की राजनीति में प्रधानमंत्री मोदी के साथ नजदीकी हमेशा एक प्रमुख पहचान रही है। लेकिन हाल के बयानों में वह यह रेखांकित करते दिख रहे हैं कि NDA का हिस्सा होना और बीजेपी का हिस्सा होना एक बात नहीं है। बिहार की NDA सरकार पर कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर चिराग की हालिया सार्वजनिक टिप्पणियां भी इसी स्वतंत्र राजनीतिक रुख की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने बिहार में कुछ घटनाओं पर सरकार की आलोचना की और अपनी ही सरकार का हिस्सा होने पर असहजता जताई।
यूपी क्यों बना चिराग का अगला मैदान
बिहार के बाहर विस्तार चिराग के लिए नई बात नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश का चुनावी महत्व अलग है। 403 विधानसभा सीटों वाला यूपी देश की सबसे बड़ी विधानसभा है और यहां सामाजिक समीकरणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहती है। जुलाई से ही चिराग की पार्टी यूपी की सभी 403 सीटों पर संगठन खड़ा करने की बात कर रही है। सितंबर में उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि पार्टी यूपी में चुनाव लड़ेगी और 403 सीटों की तैयारी कर रही है। हालांकि अंतिम चुनावी तस्वीर में सीटों की संख्या और गठबंधन का स्वरूप क्या होगा, यह बाद में तय होगा। यानी फिलहाल 403 सीटों की घोषणा को संगठन विस्तार और राजनीतिक दावेदारी के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।
चिराग की नजर किस सामाजिक आधार पर
यूपी में चिराग की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दलित और युवा वोटर हो सकता है। हालांकि यूपी का सामाजिक समीकरण बिहार से अलग है, इसलिए बिहार के वोट बैंक को सीधे यूपी में दोहराना आसान नहीं होगा। चिराग ने अपने यूपी अभियान में युवाओं को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। प्रयागराज के ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पेपर लीक या प्रशासनिक लापरवाही के कारण परीक्षा रद्द होने पर छात्रों के यात्रा, ठहरने और भोजन के खर्च की भरपाई तथा ऐसे प्रयास को अटेम्प्ट में नहीं गिने जाने जैसी मांगें रखीं।
2024 ने दिया राजनीतिक आत्मविश्वास
2024 के लोकसभा चुनाव में LJP (रामविलास) ने NDA के हिस्से के तौर पर बिहार की पांच सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी पांच सीटें जीतीं। इस प्रदर्शन ने चिराग की पार्टी को केंद्र की सत्ता में महत्वपूर्ण सहयोगी के तौर पर स्थापित किया। यूपी में विस्तार की कोशिश को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है। पार्टी अगर बिहार के बाहर संगठन खड़ा करती है, तो चिराग की राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान का दायरा भी बढ़ सकता है।
NDA के लिए संदेश या सीट शेयरिंग की तैयारी?
403 सीटों पर संगठन तैयार करने का एक राजनीतिक अर्थ यह भी हो सकता है कि चुनाव से पहले पार्टी अपने लिए अधिक व्यापक दावेदारी का आधार तैयार करे। लेकिन यहां सावधानी जरूरी है। चिराग ने खुद कहा है कि गठबंधन का स्वरूप बाद में तय होगा। यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि LJP (रामविलास) NDA से अलग होकर चुनाव लड़ेगी।



