Video call from the car proved costly: अधिवक्ताओं से लेकर वादियों तक की सुविधा के लिए शुरू की गई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा के नियमों की अनदेखी करना एक अधिवक्ता को भारी पड़ गया।
चलती कार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने पर अदालत ने एक अधिवक्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोर्ट ने कहा- यह अदालत की गरिमा के खिलाफ
न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला ने कहा कि डिजिटल माध्यम से सुनवाई की सुविधा की सराहना की गई है, लेकिन यह अदालत की गरिमा की कीमत पर या न्यायिक कार्यवाही के संचालन में व्यवधान पैदा करके नहीं हो सकती।
70 से ज्यादा केस सुनती है अदालत
न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ‘‘जब इस अदालत को एक दिन में 70 से अधिक मामलों से निपटना होता है, तो सुनवाई के दौरान पृष्ठभूमि का शोर और आवाजाही इस अदालत के लिए कार्यवाही आगे बढ़ाने में बाधा उत्पन्न करते हैं।”
1 हफ्ते में जमा करना होगा जुर्माना
अदालत ने आदेश दिया, “डिक्री धारक के अधिवक्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है, जिसका भुगतान आज से एक सप्ताह के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति को किया जाना है।’’
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. वकील ने क्या गलती की थी?
वकील चलती कार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुआ था, जिससे बैकग्राउंड में शोर और हलचल हो रही थी।
Q2. कोर्ट ने कितना जुर्माना लगाया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
Q3. जुर्माना कहां जमा होगा?
यह राशि एक सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा करनी होगी।
Q4. कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला ने कहा कि वर्चुअल सुनवाई की सुविधा कोर्ट की गरिमा की कीमत पर नहीं ली जा सकती, एक दिन में 70 से ज्यादा केस सुनने होते हैं, शोर से कार्यवाही बाधित होती है।



