Flight Ticket GST Refund: फ्लाइट टिकट कैंसिल होने पर किराया और टैक्स लौटाने के मामले में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल ने अहम फैसला सुनाया है। सिंगापुर एयरलाइंस के मामले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि यदि एयरलाइन कैंसिल टिकटों का पूरा किराया और GST यात्रियों को वापस कर चुकी है और इसके पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं, तो वह जमा किए गए GST के रिफंड का दावा कर सकती है।
यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान रद्द हुई उड़ानों से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने 45.92 लाख रुपये के आठ रिफंड दावों को दो सप्ताह में प्रोसेस करने और ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है।
फ्लाइट कैंसिल होने पर GST का क्या होता है?
जब कोई फ्लाइट रद्द होती है, तो यात्री के लिए सबसे अहम सवाल अपना पैसा वापस मिलने का होता है। टिकट के किराये के साथ चुकाए गए टैक्स का रिफंड भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। सिंगापुर एयरलाइंस का मामला इसी टैक्स रिफंड से जुड़ा है। एयरलाइन ने कोविड-19 महामारी के दौरान रद्द हुई उड़ानों के यात्रियों को GST सहित पूरा किराया लौटा दिया था। इसके बाद उसने टैक्स विभाग से उस GST की वापसी मांगी, जिसे वह पहले सरकार के पास जमा करा चुकी थी। GST अपीलेट ट्रिब्यूनल की एर्नाकुलम बेंच ने पाया कि एयरलाइन ने यात्रियों को पैसा लौटाने के पर्याप्त सबूत पेश किए हैं। साथ ही, टैक्स का बोझ किसी दूसरे व्यक्ति पर नहीं डाला गया था।
45.92 लाख रुपये के रिफंड दावे पर क्या हुआ?
यह मामला अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच किए गए GST रिफंड के आठ दावों से संबंधित है। इन सभी दावों की कुल रकम 45.92 लाख रुपये थी। एयरलाइन ने रद्द हुई उड़ानों के टिकटों पर यात्रियों को रिफंड दिया था। इसके लिए क्रेडिट नोट भी जारी किए गए, लेकिन वह इन क्रेडिट नोटों को अपने आउटपुट टैक्स दायित्व के विरुद्ध समायोजित नहीं कर पाई। इसके बाद एयरलाइन ने जमा किए गए GST की वापसी का दावा किया। हालांकि, GST ज्वाइंट कमिश्नर ने उसके रिफंड दावों को खारिज कर दिया। मामला आगे ट्रिब्यूनल पहुंचा, जहां 16 अक्टूबर को दिए गए आदेश में पहले के फैसले को पलट दिया गया।
ट्रिब्यूनल ने एयरलाइन के पक्ष में क्यों दिया फैसला?
ट्रिब्यूनल ने माना कि एयरलाइन ने यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज दिए कि रद्द टिकटों का पैसा संबंधित यात्रियों को वापस कर दिया गया था। फैसले में इस बात को भी अहम माना गया कि एयरलाइन ने टैक्स का बोझ किसी दूसरे पक्ष पर नहीं डाला था। यात्रियों को GST सहित पूरा किराया लौटाने के बाद एयरलाइन ने टैक्स विभाग से जमा GST की वापसी मांगी थी। ट्रिब्यूनल ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि वह सिंगापुर एयरलाइंस के दावों को दो सप्ताह के भीतर प्रोसेस करे और ब्याज सहित पूरी रकम का भुगतान करे।
कोविड के दौरान रद्द हुई थीं उड़ानें
कोविड-19 महामारी के दौरान यात्रा पर लगी पाबंदियों और उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। सिंगापुर एयरलाइंस ने भी कई उड़ानें रद्द की थीं और प्रभावित यात्रियों को GST सहित पूरा किराया वापस किया था। इसके बाद टैक्स रिफंड को लेकर एयरलाइन और विभाग के बीच विवाद हुआ। ट्रिब्यूनल के फैसले ने इस मामले में एयरलाइन के दावे को स्वीकार कर लिया।
क्या इस फैसले से यात्रियों को भी मिलेगा फायदा?
इस फैसले का सीधा संबंध एयरलाइन की ओर से जमा किए गए GST की वापसी से है। यानी ट्रिब्यूनल ने यात्रियों को पहले ही लौटाए गए किराये और टैक्स के आधार पर एयरलाइन के रिफंड दावे को स्वीकार किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि यात्रियों को उसी टिकट का दोबारा रिफंड मिलेगा। न ही इस फैसले से भविष्य में फ्लाइट टिकटों की कीमत घटने की गारंटी मिलती है। हालांकि, फ्लाइट कैंसिलेशन और टैक्स रिफंड से जुड़े मामलों में यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें यात्रियों को वास्तविक रिफंड देने और उसके दस्तावेजी प्रमाण पेश करने की अहमियत स्पष्ट होती है।



