बुधवार, 4 नवंबर 2026 बुध, 4 नवं |
संस्करण:
राष्ट्रीय

YouTubers school entry: सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति पत्रकारों और YouTubers पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जानें कोर्ट ने क्या कहा

YouTubers school entry: सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति पत्रकारों और YouTubers पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, जानें कोर्ट ने क्या कहा
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
TRP अलर्ट्स

ताज़ा समाचार तुरंत पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

नई दिल्ली। सीजेपी (Cockroach Janata Party) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद सरकारी स्कूलों में अब बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर सख्ती देखने को मिल रही है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया यूजर्स और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।

क्या है मामला

मामला राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और स्कूल परिसर में फोटो-वीडियो बनाने से जुड़े प्रतिबंधों का है। याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर को विशेष रूप से चुनौती दी गई थी।

इस सर्कुलर के अनुसार, सरकारी स्कूल परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से पहले अनुमति लेना जरूरी किया गया है। इसके अलावा स्कूल परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी पहले से लिखित अनुमति लेने का प्रावधान किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। पीठ ने याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के संबंधित आदेशों की वैधता पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल अनुच्छेद 32 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार किया है।

पत्रकारों और YouTubers के प्रवेश पर भी प्रतिबंध

याचिका में इन प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस तरह के आदेशों के कारण सरकारी स्कूलों की स्थिति और वहां उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी कमियों एवं समस्याओं को सामने लाने में मुश्किल हो सकती है। खास तौर पर पत्रकारों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के स्कूलों में जाने तथा वहां फोटो या वीडियो बनाने को लेकर अनुमति की अनिवार्यता पर आपत्ति जताई गई थी।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भी जारी हुआ था आदेश

उत्तर प्रदेश के मामले में याचिका में अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 19 अगस्त 2026 को जारी आदेश का भी उल्लेख किया गया। इस आदेश में बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना काउंसिल स्कूलों में प्रवेश करने से रोका गया है। इसके साथ ही बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग पर भी रोक लगाई गई है।

कई जिलों में जारी किए गए ऐसे निर्देश

याचिका के अनुसार, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं। याचिका में दावा किया गया कि इन प्रतिबंधों का असर सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति और वहां की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सार्वजनिक करने पर पड़ सकता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित आदेशों की संवैधानिक वैधता पर कोई विस्तृत फैसला नहीं दिया है। अदालत ने केवल अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर विचार करने से इनकार किया है। ऐसे में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जारी संबंधित प्रशासनिक आदेश अपनी जगह प्रभावी हैं और उनकी वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका के आधार पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

TRP Desk S
लेखक / पत्रकार:

TRP Desk S

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

The Rural Press सम्पादकीय दल सभी खबरें देखें →
विज्ञापन