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महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल! SIR के खिलाफ हाईकोर्ट में दो याचिकाएं, CEC के 14 फैसलों को चुनौती

Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी सियासी बहस के बीच अब मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। 24 सितंबर को हाईकोर्ट में दाखिल दो अलग-अलग रिट याचिकाओं में मतदाता सूची से हटाए गए नाम बहाल करने, SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े […]

Bombay High Court and Election Commission of India SIR voter list controversy in Maharashtra
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Maharashtra SIR: महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी सियासी बहस के बीच अब मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। 24 सितंबर को हाईकोर्ट में दाखिल दो अलग-अलग रिट याचिकाओं में मतदाता सूची से हटाए गए नाम बहाल करने, SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी गई है। इनमें से एक याचिका कोल्हापुर बेंच और दूसरी बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दाखिल हुई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच में दाखिल याचिका में पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक फैसलों और कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि इनमें से कुछ फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज की थी।

14 फैसलों पर रिकॉर्ड की मांग

याचिका में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डेटा, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की भूमिका और सॉफ्टवेयर से जुड़े फैसलों का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित 14 फैसलों और दर्ज असहमति को अदालत के रिकॉर्ड पर रखने की मांग भी की है। याचिका में महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और SIR वाले राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को तब तक टालने की मांग की गई है, जब तक कानूनी रूप से अनुपालन करने वाली नई मतदाता सूचियां तैयार और मंजूर नहीं हो जातीं।

SIR की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर दूसरी याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में दाखिल दूसरी याचिका महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार को लेकर सवाल उठाती है। यह याचिका मुंबई के दो निवासियों की ओर से दायर की गई है। इस याचिका में SIR को पूरी तरह रोकने की मांग नहीं की गई है। इसके बजाय याचिकाकर्ताओं ने SIR शुरू करने के आदेश, इसके पीछे दर्ज कारणों, अपनाई जा रही कार्यप्रणाली और कानूनी आधार को सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही पात्र मतदाताओं के गलत तरीके से नाम हटने से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की गई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि Enumeration Form भरने के दौरान कुछ बूथ लेवल अधिकारियों ने ऐसे दस्तावेज मांगे, जिन्हें महाराष्ट्र के SIR निर्देशों के तहत अनिवार्य नहीं बताया गया था। यह आरोप अभी याचिकाकर्ताओं के दावे के रूप में ही सामने आया है।

हटाए गए मतदाताओं की बहाली और न्यायिक जांच की मांग

कोल्हापुर बेंच वाली याचिका में SIR के दौरान हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है। इसके अलावा डेटा डिलीट होने और सॉफ्टवेयर से जुड़ी कथित समस्याओं की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने का आग्रह किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

28 सितंबर को हो सकती है सुनवाई

दोनों याचिकाएं अभी न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरण में हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों मामलों का संबंधित पीठों के समक्ष 28 सितंबर को उल्लेख किए जाने की संभावना है।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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