NHAI asked the SC a question: देश के नेशनल हाईवे पर आवारा मवेशियों और कुत्तों की समस्या अब सुप्रीम कोर्ट में बड़ी बहस का मुद्दा बन गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूछा है — “हम हाईवे बनाएं या पशुओं के लिए शेल्टर होम?”
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, एनएचएआई और अन्य एजेंसियों को यह निर्देश दिया था कि वे राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा मवेशियों और जानवरों को हटाएं। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि उन्हें ऐसे शेल्टर में रखा जाए जहां उनकी ठीक से देखभाल हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया था।
शेल्टर होम बनाने में लगेंगे अरबों रुपए
NHAI ने कहा है कि यदि उसे पूरे देश में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने का निर्देश दिया जाता है, तो इसमें करीब 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जो एजेंसी के मूल कार्य से अलग है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला मेंशन किया। उन्होंने कहा–”आवारा मवेशियों से जुड़ा एक मामला है। मैं NHAI की ओर से एक याचिका दाखिल कर रहा हूं। NHAI को देशभर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर होम बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें लगभग 7,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। हमारा कहना है कि यह काम स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन को करना चाहिए। हम इसे पूरे देश में नहीं कर सकते।”
इस पर CJI ने मामले को गंभीर मानते हुए स्पेशल बेंच के गठन पर सहमति दी। SG मेहता ने जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की स्पेशल बेंच में सुनवाई की मांग की थी। कोर्ट ने कहा–”हम गठन करेंगे।”
पूरा मामला क्या है?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर आवारा मवेशियों के बैठने से हर साल सैकड़ों सड़क हादसे होते हैं।
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली स्पेशल बेंच ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, NHAI और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया था कि–
1. हाईवे से सभी आवारा मवेशियों और जानवरों को तुरंत हटाया जाए।
2. उन्हें ऐसे शेल्टर होम में रखा जाए जहां चारा, पानी और चिकित्सा की व्यवस्था हो।
3. यह सुनिश्चित किया जाए कि वे दोबारा हाईवे पर न आएं।
NHAI की दलील क्या है?
NHAI का तर्क है कि उसका काम सड़क बनाना, मेंटेन करना और टोल वसूलना है, पशु कल्याण नहीं। पूरे देश में 1.5 लाख किमी से ज्यादा नेशनल हाईवे नेटवर्क है। यदि हर 50-100 किमी पर शेल्टर बनाना पड़ा तो–
– जमीन अधिग्रहण अलग से करना पड़ेगा
– 7000 करोड़ से ज्यादा का बजट लगेगा
– स्टाफ, डॉक्टर, चारा की स्थायी व्यवस्था करनी पड़ेगी
– ये काम नगर निगम, पंचायत और जिला पशुपालन विभाग का है, NHAI का नहीं
NHAI ने कहा कि हाईवे से मवेशी हटाने में वह सहयोग कर सकता है, लेकिन शेल्टर होम का निर्माण और संचालन स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन को सौंपा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
अब CJI द्वारा स्पेशल बेंच का पुनर्गठन किया जाएगा और उसी बेंच में NHAI की याचिका पर सुनवाई होगी। इस फैसले से तय होगा कि हाईवे पर आवारा पशुओं की जिम्मेदारी किसकी होगी — NHAI की या राज्य सरकारों और जिला प्रशासन की।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्तों के नसबंदी और वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर भी सख्त है और कई शहरों में शेल्टर होम बनाने के निर्देश पहले ही दे चुका है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. NHAI सुप्रीम कोर्ट क्यों गया है?
— SC ने NHAI को देशभर में हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाकर शेल्टर होम बनाने का निर्देश दिया था। NHAI का कहना है इसमें 7000 करोड़ का खर्च आएगा, इसलिए ये काम जिला प्रशासन को करना चाहिए, NHAI पूरे देश में शेल्टर नहीं बना सकता।
Q2. इस मामले में SG तुषार मेहता ने क्या कहा?
— SG तुषार मेहता ने CJI बेंच के सामने कहा कि आवारा पशुओं के लिए शेल्टर बनाना स्थानीय प्रशासन का काम है। साथ ही जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली स्पेशल बेंच के पुनर्गठन की मांग की।
Q3. सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
— नवंबर 2025 में SC ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों और NHAI को आदेश दिया था कि नेशनल और स्टेट हाईवे से आवारा कुत्ते-मवेशी हटाए जाएं और उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम में रखा जाए।



