Railway Ticket Checking: अगर आप अक्टूबर में ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो घर से निकलने से पहले टिकट के साथ अपना मूल पहचान पत्र जरूर रख लें। रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक देशभर में विशेष टिकट जांच अभियान चलाने जा रहा है। इस दौरान टिकट की प्रामाणिकता के साथ रियायती किराये, विशेष आरक्षण कोटे और ई-पास/पीटीओ के इस्तेमाल की भी जांच होगी।
खास बात यह है कि आरक्षित टिकट पर यात्रा कर रहे यात्रियों में कम से कम एक व्यक्ति के पास निर्धारित मूल पहचान प्रमाण नहीं मिला तो उस टिकट पर सफर कर रहे सभी यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने वाला माना जाएगा।
रेलवे बोर्ड ने जारी किए निर्देश
रेलवे बोर्ड ने इस विशेष अभियान को लेकर सभी जोनल रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधकों को निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने 25 सितंबर को इस संबंध में पत्र जारी किया है। निर्देशों के मुताबिक टिकट जांच कर्मचारियों को यह भी देखना होगा कि यात्री जिस रियायत या आरक्षण कोटे के तहत टिकट लेकर सफर कर रहा है, वह उस सुविधा के लिए पात्र है या नहीं। इसके लिए निर्धारित मूल पहचान प्रमाण की जांच अनिवार्य होगी।
रियायत वाले टिकट पर ज्यादा सतर्कता
किसी विशेष रियायत या आरक्षण कोटे के तहत टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को अपनी पात्रता साबित करनी होगी। इसके लिए उन्हें निर्धारित मूल पहचान प्रमाण दिखाना होगा। यानी सिर्फ टिकट दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। जिस आधार पर रियायत या विशेष कोटे का लाभ लिया गया है, उससे जुड़ी पात्रता भी जांची जाएगी।
ई-पास और PTO पर भी रहेगी नजर
रेलवे ई-पास और PTO के आधार पर यात्रा करने वाले यात्रियों की भी जांच करेगा। ऐसे टिकट पर यात्रा कर रहे यात्रियों में कम से कम एक व्यक्ति के पास निर्धारित मूल पहचान प्रमाण होना जरूरी होगा। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि ई-पास या PTO को पहले निर्धारित यात्रा प्राधिकार में परिवर्तित कराया गया है या नहीं। बिना निर्धारित यात्रा प्राधिकार में बदले ई-पास या PTO के आधार पर यात्रा की अनुमति नहीं होगी।
अनारक्षित टिकट भी जांच के दायरे में
रेलवे बोर्ड ने टिकट जांच कर्मचारियों को यात्रियों के पास मौजूद टिकटों की प्रामाणिकता जांचने के निर्देश दिए हैं। इसमें खास तौर पर अनारक्षित टिकटों की भी जांच की जाएगी। टिकटों के सत्यापन के लिए TTE एप का इस्तेमाल किया जाएगा। स्टेशनों पर टिकट संग्रह करने और एप के जरिए उनकी वास्तविकता जांचने पर भी विशेष जोर रहेगा।
अभियान खत्म होने के बाद देनी होगी रिपोर्ट
रेलवे के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य आरक्षण सुविधाओं के दुरुपयोग और रेलवे राजस्व को होने वाले नुकसान को रोकना है। बोर्ड ने संबंधित कर्मचारियों को पहले जारी किए गए निर्देशों की जानकारी दोबारा देने और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। अभियान समाप्त होने के 10 दिनों के भीतर सभी जोनल रेलवे को इसकी संक्षिप्त रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजनी होगी।



