CG Politics: छत्तीसगढ़ में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि राज्य में सड़कों की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक मुख्य सड़कें और राजमार्ग बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीडब्ल्यूडी बना ‘डामर घोटाले और टेंडर कमीशनखोरी’ का केंद्र
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग अब विकास का जरिया न रहकर केवल डामर घोटाले और टेंडर कमीशनखोरी का मुख्य अड्डा बनकर रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा किए जा रहे सुशासन के दावे केवल विज्ञापनों और होर्डिंग्स तक ही सीमित हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि जनता धूल खाने और रोजाना होने वाले हादसों में अपनी जान गंवाने को मजबूर है, लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
पसंदीदा ठेकेदारों को रेवड़ियों की तरह टेंडर बांटने का आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग में एक खास सिंडिकेट हावी हो चुका है। निर्माण कार्यों में बेहद घटिया किस्म के डामर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहली ही बारिश की बौछार में पूरी तरह बह जाता है। गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है और पसंदीदा ठेकेदारों को रेवड़ियों की तरह टेंडर बांटे जा रहे हैं, जबकि बजट की एक बड़ी राशि भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही है।
बदहाल सड़कों से व्यापार सुस्त, हादसों और बीमारियों का बढ़ा खतरा
सड़कों की इस जर्जर स्थिति का सीधा असर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा है। सड़कों पर उड़ती धूल और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहनों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है। मरीज ले जा रही एम्बुलेंस गड्ढों में फंस रही हैं और धूल के गुबार से आसपास के निवासियों तथा राहगीरों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। आए दिन होने वाले भीषण सड़क हादसों के कारण निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवा रहे हैं।
15 अक्टूबर तक की डेडलाइन का क्या हुआ?’ – बैज ने पूछे तीखे सवाल
दीपक बैज ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि सड़कों को दुरुस्त और गड्ढा मुक्त करने के लिए सरकार ने 15 अक्टूबर तक की जो समय-सीमा (डेडलाइन) तय की थी, उसका धरातल पर क्या नतीजा निकला? क्या वह डेडलाइन केवल एक कागजी जुमला बनकर रह गई? बैज ने पूछा कि सड़कों की मरम्मत और पैचवर्क के नाम पर जो करोड़ों रुपये जारी किए गए थे, वह राशि आखिरकार किसकी जेब में गई?
कांग्रेस शासनकाल के कड़े निरीक्षण तंत्र और योजनाओं की याद दिलाई
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए दीपक बैज ने कहा कि उस दौरान प्रदेश के कोने-कोने में बुनियादी ढांचे और ग्रामीण-शहरी सड़कों का सुदृढ़ीकरण प्राथमिक आधार पर किया गया था। कड़े निरीक्षण तंत्र और सड़क सुधार योजनाओं के बल पर गुणवत्ता बनी रहती थी। यहां तक कि गांवों में किसानों के खेतों तक धरसा सड़कों की योजनाएं लागू की गई थीं। लेकिन आज वही छत्तीसगढ़ ‘धूल और गड्ढों के राज्य’ के रूप में पहचाना जा रहा है।
घटिया सामग्री और भ्रष्ट अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि सड़क बनने के महज कुछ ही हफ्तों के भीतर डामर के बह जाने की जांच होनी चाहिए। घटिया सामग्री की आपूर्ति करने वाली कंपनियों, दोषी ठेकेदारों और भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। जनता अपने खून-पसीने की कमाई का टैक्स दे रही है, लेकिन भाजपा सरकार बदले में उन्हें गड्ढे और जानलेवा सड़कें दे रही है।
जनता के जान-माल की रक्षा में विफल सरकार
बैज ने कहा कि खराब सड़कों और गड्ढों के कारण आए दिन हो रही मौतों और सड़क हादसों की नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री को स्वीकार करनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा करने में यह सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। कांग्रेस पार्टी जनता के इस दर्द और परेशानी पर खामोश नहीं बैठेगी और जनहित के इस मुद्दे को हर स्तर पर मजबूती से उठाएगी।



