Home राष्ट्रीय प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी Passenger Trains, 109 जोड़ी ट्रेन चलाने का मांगा प्रपोजल

प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी Passenger Trains, 109 जोड़ी ट्रेन चलाने का मांगा प्रपोजल

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प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी Passenger Trains, 109 जोड़ी ट्रेन चलाने का मांगा प्रपोजल
प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी Passenger Trains, 109 जोड़ी ट्रेन चलाने का मांगा प्रपोजल

नई दिल्ली। पुरे देश में कोरोना वायरस ( Coronavirus ) का संकट लगातार बता ही जा रहा है। कोरोना के चलते देश की आर्थिक गति पर खासा असर पड़ा है। माना जा रहा है कि भारती रेलवे ( Indian Railways ) को भी कोरोना काल में खासा नुकसान हुआ है। इस बीच जो बड़ी खबर सामने आई है वो ये कि रेलवे ने अब प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का फैसला लिया है। यानी देश में कुछ पैसेंजर ट्रेनें ( passenger trains ) अब प्राइवेट कंपनियां ( Private Company ) चला सकेंगी।

रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए प्राइवेट पार्टिसिपेशन(Private participation) को लेकर रिक्वेस्ट मांगी है। पूरे देश के रेलवे नेटवर्क को 12 क्लस्टर में बांटा गया है और इन्हीं 12 क्लस्टर में 109 जोड़ी प्राइवेट ट्रेनें चलेंगी।

ये है रेलवे का मकसद

कोरोना काल के बीच रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने अब कुछ पैसेंजर ट्रेनों को प्राइवेट कंपनियों के जरिये चलाने का फैसला लिया है। रेलवे के मुताबिक इसका मकसद भारतीय रेल में नई तकनीक का विकास करना है ताकि मेंटेनेंस कॉस्ट को कम किया जा सके. इसके अलावा रेलवे का दावा है कि इससे नई नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे।

ऐसे चलेंगी ट्रेन

पूरे देश के रेलवे नेटवर्क को 12 क्लस्टर में बांटा गया है और इन्हीं 12 क्लस्टर में 109 जोड़ी प्राइवेट ट्रेनें चलेंगी। हर ट्रेन कम से कम 16 डिब्बे की होगी और यह ट्रेन अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
इन ट्रेनों का रोलिंग स्टॉक निजी कंपनी खरीदेगी। मेंटेनेंस उसी का होगा रेलवे सिर्फ ड्राइवर और गार्ड देगा।

30 हजार करोड़ के इनवेस्टमेंट की संभावना

देश में 109 डेस्टिनेशन रूट पर प्राइवेट कंपनियां ट्रेन चला सकेंगी। इसमें 30 हजार करोड़ रुपये के इनवेस्टमेंट की संभावना है।

पहली बार उठाया कदम

यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भारतीय रेलवे ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है। रेलवे ने पहली बार प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का रास्ता साफ किया है। इस कदम के तहत रेलवे 35 साल के लिए ये प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपिनयों को देगी।

मेक इन इंडिया के तहत होगा निर्माण

इन सभी ट्रेक को मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही निर्मित किया जाएगा। जिन कंपनियों को मौका मिलेगा वे इसक रख रखाव से लेकर इसके संचालन और वित्तपोषण आदि चीजों की जिम्मेदारी संभालेगी। रेलवे की मानें तो इससे ट्रांजिट टाइम में कमी आएगी। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, सेफ्टी का भरोसा मजबूत होगा और यात्रियों को वर्ल्ड क्लास ट्रैवल का अनुभव होगा।

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