सोमवार, 5 अक्तूबर 2026 सोम, 5 अक्तू॰ |
संस्करण:
ब्रेकिंग न्यूज़
पब्लिक इंटरेस्ट

बर्फीले पहाड़ों के बीच बसा वो गांव, जहां सेना की वर्दी पहनना है परिवार की परंपरा, पढ़े दिलचस्प किस्सा

Army Village Story: लद्दाख के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों के बीच बसा चूशोत गांव भारतीय सेना के साथ अपने गहरे रिश्ते के लिए जाना जाता है। करीब 63 घरों वाले इस छोटे से गांव में पीढ़ियों से युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते आ रहे हैं। गांव के कई जवान आज भी […]

Chushot Village Ladakh
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Army Village Story: लद्दाख के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों के बीच बसा चूशोत गांव भारतीय सेना के साथ अपने गहरे रिश्ते के लिए जाना जाता है। करीब 63 घरों वाले इस छोटे से गांव में पीढ़ियों से युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते आ रहे हैं। गांव के कई जवान आज भी सीमावर्ती इलाकों में तैनात हैं, जबकि उनके परिवार अपने सैनिकों की सुरक्षित वापसी का इंतजार करते हैं।

चूशोत में सेना में जाना किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है। कई परिवारों में दादा और पिता के बाद बेटों ने भी सेना की वर्दी पहनी है। गांव के युवाओं का भारतीय सेना और खासकर लद्दाख स्काउट्स से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। यही परंपरा आज भी आगे बढ़ रही है और युवा देशसेवा को अपने भविष्य का अहम हिस्सा मानते हैं।

कई जवान सीमावर्ती इलाकों में तैनात

चूशोत के कई जवान वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम इलाकों में तैनात बताए जाते हैं। बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले इन जवानों के परिवार गांव में रहते हैं। कई बार सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार सुविधाओं की कमी और सुरक्षा कारणों से जवानों से नियमित बातचीत भी नहीं हो पाती। ऐसे में परिवारों को उनकी कुशलता की खबर का इंतजार रहता है।

जवानों पर गर्व, लेकिन परिवार में डर का माहौल

गांव के परिवार अपने बेटों और रिश्तेदारों के सेना में होने पर गर्व महसूस करते हैं। हालांकि, सीमा पर तैनाती की खबर के साथ उनके मन में जवानों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी रहती है। कई परिवारों में सेना की सेवा पुरानी परंपरा है, इसलिए बच्चों को भी बचपन से देशसेवा और सैन्य जीवन के बारे में प्रेरणा मिलती है।

महिलाओं को भी सेना में जाने का अवसर चाहिए

गांव की महिलाओं में भी देशसेवा को लेकर उत्साह है। उनका कहना है कि यदि उन्हें पर्याप्त अवसर और सुविधाएं मिलें तो वे भी सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहेंगी। गांव की महिलाओं और पूर्व सैनिकों का मानना है कि बेटों और बेटियों दोनों के लिए बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है।

देशसेवा की परंपरा के साथ बदलाव की उम्मीद

चूशोत की पहचान सिर्फ लद्दाख के खूबसूरत पहाड़ों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से नहीं है। यह गांव उन परिवारों की कहानी भी बताता है, जिनकी कई पीढ़ियां देश की सेवा में समर्पित रही हैं। अब गांव के लोगों की उम्मीद है कि सेना में जाने की परंपरा के साथ शिक्षा के अवसर भी बढ़ें, ताकि यहां के बच्चे अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और अपने भविष्य के लिए ज्यादा विकल्प चुन सकें।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

विज्ञापन