Jitiya Vrat 2026: हिंदू धर्म में संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल कामना के लिए कई व्रत रखे जाते हैं। इनमें जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। साल 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। यह व्रत तीन दिनों तक चलता है।
दूसरे दिन महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार, जीमूतवाहन ने एक नाग की जान बचाने के लिए अपने प्राण दांव पर लगा दिए थे।
जितिया व्रत 2026 कब है?
साल 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। व्रत की शुरुआत एक दिन पहले नहाय-खाय से होगी और तीसरे दिन पारण किया जाएगा।
- नहाय-खाय: 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- निर्जला व्रत: 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
- पारण: 4 अक्टूबर 2026, रविवार, सुबह 7:28 बजे के बाद
जितिया व्रत में दूसरे दिन पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखा जाता है। यानी इस दौरान पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता।
जितिया व्रत में किस भगवान की पूजा होती है?
जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत में मुख्य रूप से भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। इसके अलावा सूर्य नारायण और माता जगदंबा यानी पार्वती की भी पूजा का विधान बताया गया है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुरक्षा की कामना से रखती हैं।
कौन थे भगवान जीमूतवाहन?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान जीमूतवाहन एक दयालु, धर्मात्मा और परोपकारी गंधर्व राजकुमार या राजा थे। हिंदू धर्म में उन्हें खास तौर पर जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत के संदर्भ में पूजा जाता है। जीमूतवाहन गंधर्व राज जीमूतकेतु के पुत्र बताए गए हैं। उनका मन राज-पाट में नहीं लगा। उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया और अपने माता-पिता की सेवा के लिए वन में रहने लगे। उनका विवाह मलयवती नामक कन्या से हुआ था।
शंखचूड़ को बचाने के लिए खुद लेट गए जीमूतवाहन
पौराणिक कथा के अनुसार, गरुड़ और नागों के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत नाग प्रतिदिन एक नाग को गरुड़ के आहार के रूप में भेजते थे। एक दिन शंखचूड़ नामक नाग की बारी आई। उसकी वयोवृद्ध माता के विलाप को देखकर जीमूतवाहन का हृदय द्रवित हो गया। उन्होंने शंखचूड़ की जगह खुद गरुड़ का आहार बनने का फैसला किया। जीमूतवाहन ने लाल वस्त्र ओढ़कर खुद को वध शिला पर लिटा दिया। गरुड़ ने उन्हें नाग समझकर पकड़ लिया और खाने लगे। बाद में जब गरुड़ को पता चला कि जीमूतवाहन ने एक नाग की जान बचाने के लिए अपने प्राण दांव पर लगा दिए हैं, तो वे बेहद लज्जित और प्रसन्न हुए। इसके बाद गरुड़ ने भविष्य में कभी भी नागों का शिकार न करने की प्रतिज्ञा ली।
जितिया व्रत में जीमूतवाहन की पूजा क्यों होती है?
जितिया व्रत की मान्यता में भगवान जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार की कथा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी वजह से जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान उनकी पूजा की जाती है। माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। भगवान जीमूतवाहन की कथा भी इसी व्रत के धार्मिक संदर्भ का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
FAQs
Q1. साल 2026 में जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
उत्तर: साल 2026 में मुख्य निर्जला जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।
Q2. जितिया व्रत 2026 में पारण का शुभ समय क्या है?
उत्तर: जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 7:28 बजे के बाद किया जाएगा।
Q3. जितिया व्रत में मुख्य रूप से किस भगवान की पूजा होती है?
उत्तर: इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान जीमूतवाहन, सूर्य नारायण और माता जगदंबा (पार्वती) की पूजा की जाती है।
Q4. भगवान जीमूतवाहन कौन थे?
उत्तर: भगवान जीमूतवाहन गंधर्व राज जीमूतकेतु के अत्यंत परोपकारी पुत्र थे, जिन्होंने एक नाग के प्राण बचाने के लिए खुद को न्योछावर कर दिया था।
Q5. जितिया व्रत का नहाय-खाय कब है?
उत्तर: जितिया व्रत का पहला दिन यानी नहाय-खाय 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है।



