Maa Durga Khoicha: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा का खोइछा भरने की परंपरा बिहार के मिथिलांचल में खास महत्व रखती है। मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं संतान, पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से माता रानी का खोइछा भरती हैं।
यह परंपरा खास तौर पर महाष्टमी और महानवमी के अवसर पर निभाई जाती है। साल 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर से शुरू होगी और 19 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी। वहीं नवमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर तक रहेगी।
2026 में महाष्टमी और महानवमी कब है?
पंचांग में दी गई तिथियों के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी और महानवमी की तिथियां इस प्रकार हैं।
- महाष्टमी तिथि: 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक।
- महानवमी तिथि: 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक।
महाष्टमी को महा दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। खोइछा भरने की परंपरा इन दोनों तिथियों पर निभाई जाती है। पूजा का समय तय करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग और पूजा की परंपरा के अनुसार तिथि की पुष्टि कर लें।
खोइछा भरने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?
मां दुर्गा का खोइछा भरने के लिए सुहाग की सामग्री के साथ पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं रखी जाती हैं। इनमें शामिल हैं:
- लाल कपड़ा
- साड़ी
- सिंदूर, चूड़ी, आलता, बिंदी, नेल पॉलिश और अन्य श्रृंगार सामग्री
- फल और मिठाई
- 5 पान के पत्ते
- 5 सुपारी
- 1 नारियल
- चावल या अक्षत
- दूर्वा
- हल्दी का टुकड़ा
- दक्षिणा यानी पैसे
मां दुर्गा का खोइछा कैसे भरें?
खोइछा भरने के लिए सबसे पहले मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद कपड़े पर साड़ी, सिंदूर, चूड़ी, आलता, नेल पॉलिश, बिंदी और अन्य सुहाग की सामग्री रखें।
अब इसमें पांच पान के पत्ते, पांच सुपारी, एक नारियल, दक्षिणा, मिठाई, फल, फूल, अक्षत, दूर्वा और हल्दी का टुकड़ा रखें। इसके बाद पास में दीपक और धूप जलाएं।
सभी सामग्री रखने के बाद हाथ जोड़कर मां दुर्गा से अपनी मनोकामना कहें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और लाल कपड़े को अच्छी तरह बांध दें। इसके बाद इस कपड़े को मां दुर्गा के पास रख दें।
क्या है मां दुर्गा का खोइछा भरने का धार्मिक महत्व?
बिहार और मिथिलांचल में खोइछा देने की परंपरा पारिवारिक रीति-रिवाजों से भी जुड़ी है। मान्यता है कि बेटी जब मायके आती है, तो विदाई के समय उसे खोइछ देकर विदा किया जाता है। इसी परंपरा को नवरात्रि में मां दुर्गा से भी जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता रानी अपने मायके आती हैं, तो पूजन या विदाई के समय उन्हें सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर खोइछा भरा जाता है। यह परंपरा माता रानी से परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सुरक्षा की कामना का प्रतीक मानी जाती है। यह जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण होने का दावा नहीं किया जाता।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसकी वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जाता। पूजा की तिथि और विधि के लिए स्थानीय पंचांग तथा अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।)



