Pitru Paksha Saptami Shraddha 2026: पितृ पक्ष का सप्तमी श्राद्ध आज, शुक्रवार 2 अक्टूबर को किया जा रहा है। पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि उन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध के लिए मानी जाती है, जिनका देहांत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ हो। इस दिन पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज और दान करने की परंपरा है। इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
पितृ पक्ष 16 दिनों का समय होता है। इस दौरान लोग अपने मृत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी इस दौरान अलग-अलग उपाय किए जाते हैं।
किस पूर्वज के लिए किया जाता है सप्तमी श्राद्ध?
पितृ पक्ष की हर तिथि पर अलग-अलग पूर्वजों का श्राद्ध करने की परंपरा है। सप्तमी श्राद्ध उन परिवार के सदस्यों और पूर्वजों के निमित्त किया जाता है, जिनका गोलोकवास सप्तमी तिथि को हुआ हो। अगर आपके परिवार में किसी पूर्वज का देहांत शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था, तो उनके निमित्त आज सप्तमी श्राद्ध किया जा सकता है।
सप्तमी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त
सप्तमी श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ अपराह्न काल महत्वपूर्ण माना गया है।
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:34 बजे से 1:21 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:21 बजे से 3:44 बजे तक
- सप्तमी तिथि शुरू: 2 अक्टूबर को सुबह 10:15 बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त: 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 बजे
सप्तमी तिथि पर पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया जाता है। इस दिन ब्राह्मण भोज कराने की भी परंपरा है। जरूरतमंदों को दान करने और भगवद्गीता का पाठ करने की बात भी कही गई है।
सुबह कैसे करें तैयारी?
श्राद्ध के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो स्वच्छ सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
श्राद्ध का मुख्य अनुष्ठान आमतौर पर दोपहर के समय किया जाता है। इसके लिए अपराह्न काल या कुतुप मुहूर्त का समय रखा जाता है।
इस तरह करें तर्पण
तर्पण के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठने की परंपरा है। पितरों की दिशा दक्षिण मानी गई है। हाथ में कुशा घास, काले तिल, जौ और जल लें। इसके बाद अपने गोत्र और पूर्वजों का नाम लेते हुए उनका आह्वान करें। ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे अंगूठे की तरफ से जल भूमि पर अर्पित करें।
ऐसे करें पिंडदान
पिंड बनाने के लिए पके हुए चावल, जौ का आटा, काले तिल और घी का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों को मिलाकर छोटे-छोटे पिंड तैयार करें। पिंडों को कुशा या पत्तल पर रखें और श्रद्धाभाव से अपने पूर्वजों को अर्पित करें।
पंचबलि में किन्हें दें भोजन?
ब्राह्मण को भोजन कराने या मुख्य भोजन से पहले भोजन का कुछ हिस्सा अलग निकालने की परंपरा है। इसे पंचबलि से जोड़ा जाता है।
- गाय के लिए गौ-ग्रास
- कौवे के लिए काक-बलि
- कुत्ते के लिए भोजन
- चींटी के लिए भोजन
- पक्षियों के लिए भोजन
कौवे को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है।
ब्राह्मण भोजन और दान की परंपरा
सप्तमी श्राद्ध पर किसी योग्य और विद्वान पंडित या ब्राह्मण को घर पर आदरपूर्वक आमंत्रित करने की परंपरा है। उन्हें सात्विक भोजन कराया जाता है। इसमें आमतौर पर खीर, पूरी, दाल और सब्जी आदि शामिल होते हैं। भोजन के बाद सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को दक्षिणा, वस्त्र और फल दिए जाते हैं। इसके बाद उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
सप्तमी श्राद्ध पर क्या करें?
सप्तमी श्राद्ध के दिन पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करें। ब्राह्मण भोज कराएं। जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। भगवद्गीता का पाठ भी किया जा सकता है।
5 FAQs
1. सप्तमी श्राद्ध 2026 कब है?
सप्तमी श्राद्ध 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है।
2. सप्तमी श्राद्ध किन पूर्वजों के लिए किया जाता है?
यह उन पूर्वजों के निमित्त किया जाता है, जिनका देहांत किसी महीने के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ हो।
3. सप्तमी श्राद्ध का कुतुप मुहूर्त कब है?
कुतुप मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक है।
4. सप्तमी श्राद्ध में तर्पण कैसे किया जाता है?
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा घास, काले तिल, जौ और जल लेकर पूर्वजों का आह्वान किया जाता है। ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का उच्चारण करते हुए जल अर्पित किया जाता है।
5. सप्तमी श्राद्ध पर क्या दान करना चाहिए?
सप्तमी श्राद्ध पर जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। ब्राह्मण को सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा, वस्त्र और फल भी दिए जाते हैं।



