Chinmay Sutar Ranji Trophy: भारतीय घरेलू क्रिकेट में मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रणजी ट्रॉफी 2025-26 के प्लेट ग्रुप मुकाबले में नागालैंड के खिलाफ खेलते हुए सुतार ने 400 रन की नाबाद मैराथन पारी खेली।
इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने भारतीय घरेलू क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक्स में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
78 साल पुराना रिकॉर्ड और बीबी निंबलकर की यादें
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक पारी में 400 रन बनाने का कारनामा इससे पहले लगभग 78 साल पहले देखने को मिला था। सुतार से पहले यह अनोखा रिकॉर्ड केवल महाराष्ट्र के बीबी निंबलकर के नाम था, जिन्होंने 1948-49 के सत्र में काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। अब चिन्मय सुतार इस मुकाम को हासिल करने वाले देश के दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं।
46 चौकों और 7 छक्कों से सजी पारी
दीमापुर के सोविमा में खेले गए इस मुकाबले में मिजोरम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 581 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की। टीम के इस विशाल स्कोर के पीछे सबसे बड़ा योगदान चिन्मय सुतार का रहा। उन्होंने अपनी इस रिकॉर्ड पारी के दौरान मैदान के चारों तरफ शॉट लगाते हुए कुल 46 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के जड़े।
रणजी इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर
इस ऐतिहासिक पारी के साथ ही चिन्मय सुतार रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। इस सूची में शीर्ष पर आज भी बीबी निंबलकर (नाबाद 443 रन) कायम हैं। सुतार ने इस मामले में पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया है।
दिग्गजों के खास क्लब में शामिल हुए सुतार
चिन्मय सुतार की यह उपलब्धि केवल रणजी ट्रॉफी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 या उससे अधिक रन बनाने वाले दुनिया के चुनिंदा बल्लेबाजों के एलीट क्लब में शामिल हो गए हैं। इस खास फेहरिस्त में महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन और वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा जैसे नाम शामिल हैं। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड ब्रायन लारा (नाबाद 501 रन) के नाम है।
आखिरी विकेट के लिए बनाई रिकॉर्ड साझेदारी
सुतार की पारी का एक और रोमांचक पहलू यह रहा कि उन्होंने अंतिम छोर पर टिककर बल्लेबाजी जारी रखी। उन्होंने लालरेम्पुनिया छकछुआक के साथ मिलकर आखिरी (दसवें) विकेट के लिए नाबाद 190 रन की बड़ी साझेदारी निभाई। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में दसवें विकेट के लिए यह तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी मानी जा रही है।
मुंबई से मिजोरम तक का दिलचस्प क्रिकेट सफर
29 वर्षीय चिन्मय सुतार का करियर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने इसी साल जनवरी में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान मुंबई की तरफ से लिस्ट-ए क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद स्थानीय प्रतियोगिताओं और मुंबई टी20 लीग में अपने शानदार प्रदर्शन से उन्होंने सभी का ध्यान आकर्षित किया था।
एनओसी लेकर मिजोरम से खेलने का फैसला
घरेलू सत्र 2026-27 की शुरुआत से ठीक पहले सुतार ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किया और मिजोरम की ओर से खेलने का निर्णय लिया। मिजोरम के लिए अपने पहले रणजी मैच में मणिपुर के खिलाफ भी उन्होंने अच्छी पारियां खेली थीं, हालांकि उस मैच में उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा था।
दबाव के बीच दिखाया अद्भुत संयम और कौशल
दीमापुर के मुकाबले में जब मिजोरम के बल्लेबाज लगातार अंतराल पर आउट हो रहे थे, तब एक छोर पर टिके सुतार ने गजब का मानसिक संयम दिखाया। चायकाल के समय 392 रन पर खेल रहे सुतार ने 155वें ओवर में अपने 400 रन पूरे किए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
भविष्य के लिए खुली नई राहें
चिन्मय सुतार की यह ऐतिहासिक पारी उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। घरेलू क्रिकेट में इस तरह का बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद अब चयनकर्ताओं और क्रिकेट प्रेमियों की नजरें उनके आगामी प्रदर्शन पर टिकी होंगी।



