BRICS member countries represented at an international summit in India
BRICS has evolved from a four-country grouping into an influential global platform

BRICS Summit 2026: BRICS दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों का एक समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। BRICS नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है। B का मतलब Brazil यानी ब्राजील, R का मतलब Russia यानी रूस, I का मतलब India यानी भारत और C का मतलब China यानी चीन है। बाद में South Africa के शामिल होने के बाद इसमें S जुड़ा और BRIC से इसका नाम BRICS हो गया।

BRICS की नींव चार देशों-ब्राजील, रूस, भारत और चीन-के साथ पड़ी थी। 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने BRIC शब्द का इस्तेमाल इन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया था। इसके बाद इन देशों के बीच सहयोग का विचार आगे बढ़ा और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से बना BRICS
BRIC समूह का अगला बड़ा विस्तार दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से हुआ। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद समूह का नाम BRICS हो गया। 2011 में सान्या में आयोजित तीसरे BRICS शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका ने हिस्सा लिया। इसके साथ BRICS का भौगोलिक दायरा एशिया और लैटिन अमेरिका से आगे बढ़कर अफ्रीका तक पहुंच गया।

BRICS में अब कौन-कौन से देश हैं?
समूह के विस्तार के बाद BRICS में 11 सदस्य देशों को शामिल किया गया है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। नए देशों के जुड़ने से BRICS का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ा है।

BRICS का विस्तार क्यों किया गया?
BRICS के विस्तार का मकसद समूह को अधिक व्यापक और प्रतिनिधित्व वाला मंच बनाना है। नए सदस्यों के आने से एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व की भूमिका मजबूत हुई है। इससे व्यापार, ऊर्जा, निवेश और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर पैदा हुए हैं। साथ ही विकासशील देशों की सामूहिक आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलती है।

BRICS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
BRICS का एक बड़ा उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग बढ़ाना है। इसके तहत व्यापार, निवेश, विकास, वित्त और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा दिया जाता है। इसके अलावा समूह वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की मांग भी करता है।

सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है BRICS
शुरुआत में BRICS को मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग के मंच के तौर पर देखा जाता था। लेकिन अब इसका एजेंडा काफी विस्तृत हो चुका है। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दों पर भी सदस्य देश चर्चा करते हैं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?
भारत के लिए BRICS एक ऐसा मंच है, जहां वह विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठा सकता है। भारत संयुक्त राष्ट्र, IMF और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर लगातार जोर देता रहा है। BRICS के जरिए भारत ग्लोबल साउथ के हितों, आर्थिक सहयोग और अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर सकता है।

भारत की अध्यक्षता में 2026 का BRICS सम्मेलन
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन इसलिए खास है क्योंकि समूह के विस्तार के बाद पहली बार भारत व्यापक BRICS मंच की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की भूमिका में है।

एक नजर में समझिए BRICS
BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी और इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस में हुआ। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRICS नाम सामने आया। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और आज यह आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों पर भी प्रभावशाली मंच बन चुका है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।