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पंचर BMW छोड़कर घर जाना पड़ा भारी, अगले दिन जली मिली कार, 14 साल बाद मिला मुआवजा

BMW Insurance Claim: महाराष्ट्र में बीएमडब्ल्यू कार से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। हाईवे पर रात के समय कार पंचर होने के बाद उसे लॉक करके घर जाना मालिक को भारी पड़ गया। अगले दिन जब वे कार लेने पहुंचे, तो गाड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने […]

Burnt BMW Insurance Dispute
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

BMW Insurance Claim: महाराष्ट्र में बीएमडब्ल्यू कार से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। हाईवे पर रात के समय कार पंचर होने के बाद उसे लॉक करके घर जाना मालिक को भारी पड़ गया। अगले दिन जब वे कार लेने पहुंचे, तो गाड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। करीब 14 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 70.75 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

यह घटना साल 2012 की है। जानकारी के मुताबिक, रविकांत एस. महाराष्ट्र में ढोलखेड़ के पास एक राज्य राजमार्ग से अपनी बीएमडब्ल्यू कार लेकर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार का टायर पंचर हो गया। उन्होंने कार को सड़क किनारे एक ढाबे के पास खड़ा किया, उसे लॉक किया और दूसरी गाड़ी से घर चले गए। अगली सुबह लौटने पर कार जली हुई मिली।

बीमा कंपनी ने क्लेम देने से किया इनकार

कार जलने के बाद मालिक ने बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस से मुआवजे की मांग की। हालांकि, कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। कंपनी का तर्क था कि कार को बिना निगरानी के छोड़ना उचित नहीं था और मालिक को वाहन की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए थे। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंच गया और लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

अपनी सुरक्षा जोखिम में डालना जरूरी नहीं: आयोग

करीब 14 साल तक चले मामले में महाराष्ट्र के उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन की सुरक्षा के लिए किसी व्यक्ति से अपनी निजी सुरक्षा को जोखिम में डालने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आयोग के फैसले से यह संदेश गया कि बीमा दावे पर विचार करते समय परिस्थितियों और व्यक्ति की सुरक्षा को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

70.75 लाख रुपये चुकाने का आदेश

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 70 लाख रुपये के मुआवजे के साथ मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 50 हजार रुपये तथा कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में 25 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। इस तरह ब्याज को छोड़कर कुल भुगतान राशि 70.75 लाख रुपये हो गई। करीब 14 साल बाद आए इस फैसले से वाहन बीमा दावों और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक अहम संदेश मिला है।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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