लापरवाही की हद… गलत इलाज के चलते काटना पड़ा बच्ची का पैर, परिजन अब तक बदल चुके हैं 5 अस्पताल

लापरवाही की हद… गलत इलाज के चलते काटना पड़ा बच्ची का पैर, परिजन अब तक बदल चुके हैं 5 अस्पताल
लापरवाही की हद… गलत इलाज के चलते काटना पड़ा बच्ची का पैर, परिजन अब तक बदल चुके हैं 5 अस्पताल

टीआरपी डेस्क। अपनी 5 साल की बच्ची की मिर्गी की बीमारी का इलाज करा रहे परिजनों को डॉक्टरों की लापरवाही की ऐसी सजा भुगतनी पड़ी कि वे आज भी अपनी बच्ची के इलाज के लिए भटक रहे हैं। भला हो ऐसे सेवाभावी लोगों का, जिनकी मदद से बच्ची का इलाज चल रहा है, वर्ना उसके मां बाप कब के टूट गए होते।

यह मामला जशपुर से जुड़ा हुआ है, जहां रहने वाले नौशाद कुरैशी और रुखसाना की 5 साल की बच्ची रिम्सा को बार बार चक्कर आने के चलते उसे जशपुर के जिला अस्पताल में दिखाया गया। जहां डॉक्टर ने बताया कि उसे मिर्गी जैसी बीमारी है, जो लगातार दवा खाने से ठीक हो सकती है। रुखसाना बताती है कि जिला अस्पताल में पदस्थ एक डॉक्टर रिम्सा का अच्छी तरह इलाज कर रहे थे। जब भी बच्ची की बीमारी बढ़ती, वो उसे अस्पताल में भर्ती कर देती, चार पांच दिनों में बच्ची की हालत में सुधार हो जाता, और वह उसे लेकर घर आ जाती।

डॉक्टर के तबादले से बढ़ गई मुसीबत

रुखसाना बताती है कि बीते 15 जनवरी को रिम्सा की तबियत ज्यादा खराब हो गई तो वह उसे लेकर फिर जिला अस्पताल पहुंची, यहां पता चला कि बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर का तबादला हो गया है। बच्ची को कहीं और ले जाने को कहा गया, मगर रुखसाना के गिड़गिड़ाने पर उसे भर्ती कर लिया गया। मगर यहीं से लापरवाही का दौर शुरू हो गया। रुखसाना के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर बच्ची के पैर की नस के माध्यम से उसे बोतल चढ़ाया जा रहा था, लगातार ऐसा करने से धीरे धीरे पैर में घाव बनता गया, मगर बार बार बोलने के बावजूद डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। दरअसल बच्ची के पैर में गैंगरीन हो गया था।

हालत बिगड़ने पर कर दिया रेफर

जशपुर जिला अस्पताल के डॉक्टरों को जब समझ आया कि केस बिगड़ गया है तब उन्होंने बला टालने के लिए बच्ची को रायपुर रेफर कर दिया। मगर शुभचिंतकों की सलाह पर रुखसाना अपनी बच्ची को रांची के रानी हॉस्पिटल ले गई। सरकारी के बाद बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती करने के बाद रुखसाना को यहां की भरी भरकम फीस चुकानी पड़ी, एक समय ऐसा आया जब रुपए खत्म हो गए। तब पहचान के लोगों और समाज सेवियों ने उसकी मदद की और बच्ची का इलाज होता रहा, मगर उसके पैर की हालत खराब होती चली गई।

आखिरकार काटना पड़ा बच्ची का पैर

रांची में इलाज के दौरान किसी तरह इस परिवार का आयुष्मान कार्ड बन गया। तब बच्ची के इलाज में आसानी हुई मगर यहां भी अस्पताल प्रबंधन ने बला टालने के लिए बच्ची को रेफर कर दिया। परेशान रुखसाना और नौशाद अपनी बच्ची को लेकर रायपुर आ गए। यहां एम्स अस्पताल में उसे भर्ती किया गया, हालत खराब होने के चलते रिम्सा कई दिनों तक वेंटिलेटर पर थी। बाद में परिजनों को पैर में बढ़ रहे गैंगरिन को खतरनाक बताते हुए डॉक्टरों ने बच्ची के बाएं पैर के घुटने से नीचे का हिस्सा काट दिया। रुखसाना की मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई, एम्स से 6 मार्च को बच्ची को डीकेएस अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

दो अस्पतालों के बीच रेफर होती रही बच्ची

रुखसाना ने बताया कि वह डीकेएस से पहले ओम अस्पताल गई, जहां पहले ही दिन उसके 26 हजार रुपए खर्च हो गए, और अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड स्वीकार भी नहीं किया। इसके बाद वह बच्ची को लेकर डीकेएस आ गई। अस्पताल प्रबंधन ने बच्ची को भर्ती तो कर लिया गया। मगर उसे दो दिनों बाद यह कहते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया कि जिला अस्पताल रायपुर में न्यूरो सर्जन हैं। वहां उसका इलाज चलेगा, मगर जिला अस्पताल पहुंचने पर उसे इलाज की सुविधा नहीं होने का हवाला देकर वापस डीकेएस भेज दिया गया। यहां वापस आने पर उसे अंदर आने ही नहीं दिया गया।

विरोध जताने पर हरकत में आया प्रबंधन

डीकेएस अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने से परेशान रुखसाना ने अपने परिचितों को इसकी जानकारी दी। पता चलने पर भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास भी यहां पहुंचे और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर जमकर अपना गुस्सा उतारा। हड़बड़ाए डॉक्टरों ने बच्ची को तत्काल भर्ती लिया और उसका इलाज शुरू किया। इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव तक पहुंची, तब उन्होंने अपने स्टाफ को वहां भेजा। इधर विधायक विकास उपाध्याय के पी ए नरेंद्र सिंह और समाज सेवी संगठन अवाम ए हिंद के लोग भी यहां पहुंच गए। इनके अलावा राजधानी के दूसरे समाज सेवी भी आगे आ रहे हैं जो इस परिवार की मदद कर रहे हैं।
टीआरपी न्यूज़ से बातचीत में रुखसाना ने बताया कि उसकी बच्ची के पैर की मरहम पट्टी हो रही है, मगर गलत इलाज के दुष्प्रभाव के चलते रिम्सा न तो बोल पा रही है और न ही किसी को पहचान रही है। फिलहाल उसके इलाज पर रुखसाना ने संतोष व्यक्त किया है।

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