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Hindenburg Research Report: हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट मामले में गौतम अडानी को SEBI की क्लीन चिट, कहा-हिंडनबर्ग के आरोप निकले बेदम

Hindenburg Research Report: हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट मामले में गौतम अडानी को SEBI की क्लीन चिट, कहा-हिंडनबर्ग के आरोप निकले बेदम
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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Hindenburg Research Report: नई दिल्ली। SEBI Gives Clean Chit To Adani Group: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड सेबी ने उद्योगपति गौतम अडानी के अडानी ग्रुप पर लगाए गए हिंडनबर्ग रिसर्च के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सेबी ने जानकारी दी है कि जांच में अडानी ग्रुप पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं।

Hindenburg Research Report: सेबी के अनुसार, नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ, न ही बाजार में हेरफेर या भेदिया व्यापार का कोई सबूत मिला। सेबी के इस आदेश से अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड, अडानी पावर लिमिटेड, एडिकॉर्प एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, गौतम शांतिलाल अडानी और राजेश शांतिलाल अडानी को राहत मिली है।

Hindenburg Research Report: विनियमों का कोई उल्लंघन नहीं: सेबी

जांच के बाद, सेबी इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि लिस्टिंग समझौते या एलओडीआर विनियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। सेबी ने इस मामले की गहन जांच की ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वित्तीय विवरणों में संभावित गलतबयानी सहित सेबी अधिनियम का कोई उल्लंघन हुआ है। सभी विवरणों की जांच के बाद, सेबी इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ये लेन-देन वैध थे और लिस्टिंग समझौते या एलओडीआर विनियमों का उल्लंघन नहीं करते थे।

Hindenburg Research Report: सेबी ने जांच के बाद क्या कुछ कहा?

मामले पर विचार करने के बाद, सेबी ने कहा कि उसने बिना किसी निर्देश के नोटिस प्राप्तकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही को तुरंत निपटाने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अदानी समूह की चार कंपनियों ने 2020 में कंपनी को कुल ₹6.2 बिलियन ($87.4 मिलियन) का ऋण दिया, जबकि अडानी समूह के ऋणदाताओं, जिनमें से कई सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध हैं, के वित्तीय विवरणों में इन लेन-देन का खुलासा नहीं किया गया था।

Hindenburg Research Report: हिंडनबर्ग ने लगाए थे क्या आरोप

हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि एडिकॉर्प एंटरप्राइजेज ने अपनी नई पूंजी का इस्तेमाल 2020 में अडानी पावर को असुरक्षित आधार पर 6.1 बिलियन रुपए (86 मिलियन डॉलर) का ऋण प्रदान करने के लिए किया। भारत के शेयर बाजार नियामक, सेबी ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू की ताकि यह पता लगाया जा सके कि सूचीबद्ध अडानी समूह की कंपनियों ने सेबी अधिनियम का उल्लंघन किया है या नहीं।

TRP Desk S
लेखक / पत्रकार:

TRP Desk S

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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