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14,580 शिक्षक नियुक्ति मामला: ढाई साल बीते फिर भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं, प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर किए जूते पॉलिश, पुलिस ने CM हाउस जाने से रोका तो कराया मुंडन

14,580 शिक्षक नियुक्ति मामला: ढाई साल बीते फिर भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं, प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर किए जूते पॉलिश, पुलिस ने CM हाउस जाने से रोका तो कराया मुंडन
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सड़क पर गुरुवार को शिक्षक जूते पॉलिश करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने इन्हें रोजगार नहीं दिया, जिसके चलते अब बेरोजगारी की वजह से घर चलाना मुश्किल होते जा रहा है। इसीलिए अब वह जूते पॉलिश करके दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करेंगे।

दरअसल, प्रदेशभर से आए ये शिक्षक मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के लिए निकले थे। रास्ते में ही बैरिकेडिंग कर पुलिस ने रोक लिया तो नाराज होकर वहीं मुंडन कराने बैठ गए।

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सरकार सिर्फ आश्वासन ही दे रही

B.Ed. संघ के बैनर तले सड़क पर आए शिक्षक यह मांग करते रहे कि इन्हें जल्द से जल्द स्कूलों में नियुक्ति दी जाए। संगठन के प्रमुख दाऊद खान ने बताया कि लगातार सरकार इन्हें सिर्फ आश्वासन ही दे रही है। इसकी वजह से यह प्रदर्शन करना पड़ रहा है। पुलिस के रोके जाने से नाराज शिक्षकों ने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया।

जल्द से जल्द स्कूलों में नियुक्ति हो

उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती तब तक यह नहीं हटेंगे। सभी शिक्षक जल्द से जल्द स्कूलों में नियुक्ति चाहते हैं जिसे लेकर यह प्रदर्शन कर रहे हैं।

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ढाई साल बीते फिर भी नियुक्ति नहीं

बता दें कि 2019 में सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकार ने 14580 युवाओं को चुना मगर अब तक नियुक्ति नहीं दी गई। करीब ढाई साल से नौकरी दिए जाने की मांग की जा रही है। छत्तीसगढ़ के प्रशिक्षित डीएड-बीएड संघ संगठन के प्रमुख दाउद खान ने बताया कि प्रदेश में 14 हजार 580 शिक्षकों का चयन हो चुका है मगर भर्ती नहीं हो रही।

इससे पहले सभी शिक्षक किसी न किसी प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर रहे थे, सभी ने इस आस में नौकरी छोड़ दी कि उन्हें सरकार की तरफ से रोजगार मिलना था। अब कोई दूसरी नौकरी इसलिए नहीं मिलती क्योंकि ये उम्मीदवार चयनित हैं, लॉकडाउन में सभी शिक्षकों की माली हालत और भी खराब हो गई मगर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।

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Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

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