टीआरपी डेस्क। कोरोना के तेजी से बढ़ते केस और वैक्सीन की लगातार हो रही कमी को देखते हुए मिक्स डोज ( Mix Dose of Coronavirus Vaccine ) पर विचार हो रहा है। यानी कि पहले जिस कंपनी की वैक्सीन ली है, दूसरी डोज जरूरी नहीं कि वही दी जाए। समय पर जो उपलब्ध हो जाए, वह लोगों को मुहैया कराया जाए। इसकी यही अवधारणा है। यह कॉनसेप्ट अमीर या विकसित देशों के लिए नहीं है क्योंकि वहां आबादी ज्यादा नहीं है और वे अपने कोटे का इंतजाम भी कर लेंगे। यह कॉनसेप्ट तीसरी दुनिया के गरीब और पिछड़े देशों के लिए है।
भारत भी इसी लाइन में है क्योंकि यहां की आबादी ज्यादा है। अभी जिस रफ्तार से वैक्सीनेशन का काम चल रहा है, उस हिसाब से पूरी आबादी को वैक्सीन देने में साल भर लग जाएंगे। वजह यह है कि पहली डोज के बाद उसी कंपनी की दूसरी डोज के लिए इंतजार करना होगा। कब उसका निर्माण होगा और कब तक लोगों को मुहैया हो पाएगी।
क्या होंगे साइड इफेक्ट्स
मिक्स डोज पर कुछ रिसर्च हुए हैं और उसमें पता चला है कि मरीजों में साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं। थकान और सिरदर्द इसमें आम बात है, लेकिन यह शुरुआती रिजल्ट है। अभी इस पर रिसर्ज जारी है और इसे कॉकटेल वैक्सीन का नाम दिया जा रहा है। कई देश इस पर काम कर रहे हैं। चीन अपनी कुछ वैक्सीन को मिलाकर कॉकटेल वैक्सीन देने की तैयारी में है। इसी तरह कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज भी बनाई जा रही है। साइड इफ्केट की जहां तक बात है तो कंपनियां इसे गहराई से देख रही हैं और इसकी पड़ताल कर रही हैं।रिसर्च में क्या मिला
जिन लोगों को एस्ट्रा जेनेका की पहली खुराक दी गई, उन्हें 4 हफ्ते बाद फाइजर की वैक्सीन दी गई। ऐसे लोगों में हल्के साइड इफेक्ट दिखे हैं लेकिन ये घातक नहीं बताए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने दुनिया की मशहूर मेडिकल-साइंस पत्रिका दि लांसेट में इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की है। कई गरीब देशों में यह प्रयोग चल रहा है जहां टीके की मिक्स डोज ( Mix Dose of Coronavirus Vaccine ) देने की तैयारी हो रही है। अगर ऐसा होता है तो वैक्सीन की कमी से छुटकारा मिलेगा। दूसरी डोज के लिए इंतजार नहीं करना होगा कि कब बनेगा और लोगों को कब मिलेगी। समय पर जो टीका उपलब्ध हो जाए, लोगों को उसे दिया जा सकता है।सभी देश आए साथ
कुछ देशों में यह काम शुरू भी हो गया है जहां बिना मैचिंग वाले टीके दिए जा रहे हैं। वहां की सरकारें टीके का इंतजाम कर रही हैं और स्टोर कर लोगों को टीके लगा रही हैं। संकट चूंकि पूरी मानवता पर है, इसलिए टीके के इस प्रयोग और उपलब्धता में बड़े-बड़े देश आगे आ रहे हैं। फ्रांस में ऐसा देखा जा रहा है कि जिन लोगों को एस्ट्रा जेनेका की पहली डोज दी गई, उन्हें फाइजर और बायोएनटेक की दूसरी डोज लेने के लिए कहा जा रहा है। अब लोगों पर निर्भर करता है कि वे लेते हैं या नहीं। लें तो ठीक नहीं तो दूसरी ‘सेम डोज’ के लिए इंतजार करना होगा।ऑक्सफोर्ड पीडियाट्रिक्स एंड वैक्सीनोलॉजी के प्रोफेसर मैथ्यू स्नेप ने ‘ब्लूमबर्ग’ से कहा कि मिक्स डोज ( Mix Dose of Coronavirus Vaccine ) को लेकर नए-नए रिजल्ट सामने आ रहे हैं जिसके बारे में हमने कभी नहीं सोचा था। इसका इम्युनिटी पर कितना गहरा असर होगा, अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। अभी रिसर्च शुरुआती चरण में है इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ हफ्ते में मिक्स डोज की फाइंडिंग के बारे में पता चलेगा। मैथ्यू स्नेप ही अभी मिक्स डोज पर चल रही रिसर्च की अगुवाई कर रहे हैं।
