Student's Death from Malaria
Student's Death from Malaria

Student’s Death from Malaria: बीजापुर जिले के जांगला स्थित बालक आश्रम से झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाले छात्र लश्कर वट्टी की मलेरिया के कारण मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद न सिर्फ आश्रम में बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

इस घटना के बाद आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में संचालित आश्रमों में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा, नियमित जांच और समय पर इलाज की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इलाके के विधायक विक्रम मंडावी ने इस घटना पर दुःख जताते हुए आश्रम की व्यवस्था और मलेरिया मुक्त बस्तर के दावे पर सवाल उठाया है।

परिजनों ने इलाज में देरी का लगाया आरोप

जानकारी के अनुसार लश्कर वट्टी जांगला बालक आश्रम में रहकर पढ़ाई कर रहा था। कुछ दिन पहले उसे बुखार और कमजोरी की शिकायत हुई थी। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि लक्षण दिखने के बाद भी इलाज में देरी की गई। हालत बिगड़ने पर जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई।

फिलहाल प्रशासन की ओर से छात्र की बीमारी की पहचान कब हुई, इलाज कब शुरू हुआ और कहां हुआ, इसको लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी आना बाकी है।

आश्रम में दहशत, अन्य 200 से ज्यादा बच्चों का भविष्य चिंता में

छात्र लश्कर की मौत के बाद जांगला बालक आश्रम में रह रहे दूसरे बच्चों और उनके परिजनों में दहशत है। आश्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी बच्चे रहते हैं जो दूरस्थ गांवों से आते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाकी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कब और कैसे हुआ? कहीं और बच्चे भी मलेरिया या अन्य बीमारी की चपेट में तो नहीं हैं?

आश्रमों की व्यवस्था पर पूछे जा रहे हैं ये सवाल

  1. नियमित स्वास्थ्य जांच: आश्रम में बच्चों का हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण होता है या सिर्फ कागजों में?
  2. लक्षण की पहचान: लश्कर को बुखार आने के कितने दिन बाद उसकी जांच हुई?
  3. इलाज में देरी: आश्रम से अस्पताल तक पहुंचाने में कितना समय लगा?
  4. बचाव के इंतजाम: आश्रम में मच्छरदानी, फॉगिंग और साफ-सफाई की क्या व्यवस्था है?
  5. तत्काल जांच: अब अन्य सभी बच्चों की मलेरिया और सामान्य स्वास्थ्य जांच कब होगी?
  6. जवाबदेही: इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?

विधायक विक्रम मंडावी का हमला: ‘सरकार के आंकड़े झूठे’

इस घटना के बाद बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार हर मंच पर ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

विधायक ने कहा, “एक मासूम आदिवासी बच्चे की मलेरिया से मौत हो जाना इस बात का सबूत है कि सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। आश्रमों में बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है।”

मंडावी ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

बस्तर में मलेरिया: आंकड़े बनाम हकीकत

बस्तर संभाग मलेरिया के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। हर साल यहां मलेरिया उन्मूलन के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जाते हैं, दवाओं का वितरण और सर्वे होता है।

लेकिन आश्रम जैसी जगह जहां बच्चे सामूहिक रूप से रहते हैं, वहां निगरानी तंत्र का कमजोर होना इस घटना से साफ दिख रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और दवा से मौत को रोका जा सकता है।

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती

घटना के बाद प्रशासन पर दबाव है कि वह तुरंत आश्रम के सभी बच्चों की मेडिकल जांच कराए। आश्रम परिसर में सैनिटाइजेशन और फॉगिंग कराए। पेयजल और साफ-सफाई की स्थिति सुधारे।मामले की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई करे।

फिलहाल पूरे मामले की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एक छात्र की मौत ने एक बार फिर आदिवासी बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा के मुद्दे को सबसे ऊपर ला दिया है।

FAQ: बीजापुर में मलेरिया से छात्र की मौत

सवाल: बीजापुर में किस छात्र की मौत हुई?

जांगला बालक आश्रम में कक्षा 5वीं के छात्र लश्कर वट्टी की मलेरिया से मौत हुई।

सवाल: मौत का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?

मलेरिया और परिजनों के अनुसार इलाज में देरी।

सवाल: विधायक ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?

विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि सरकार का ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ का दावा खोखला और झूठा है।

सवाल: अब क्या मांग की जा रही है?

आश्रम के सभी बच्चों की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और आश्रमों में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की मांग।