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PB Fintech 36% तक टूटा, बीमा शेयरों में क्यों मचा हाहाकार? समझिए IRDAI का पूरा प्रस्ताव

PB Fintech : शेयर बाजार में 24 सितंबर को बीमा कंपनियों और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। PB Fintech के शेयर 36% तक टूट गए, जबकि Turtlemint में करीब 20% की गिरावट आई। HDFC Life और ICICI Prudential Life समेत कई बीमा शेयर भी दबाव में रहे। […]

IRDAI Insurance Proposal,
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

PB Fintech : शेयर बाजार में 24 सितंबर को बीमा कंपनियों और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। PB Fintech के शेयर 36% तक टूट गए, जबकि Turtlemint में करीब 20% की गिरावट आई। HDFC Life और ICICI Prudential Life समेत कई बीमा शेयर भी दबाव में रहे। बाजार में इस बिकवाली की बड़ी वजह भारतीय बीमा नियामक IRDAI का इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है।

IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में कमीशन, बीमा कंपनियों के खर्च, डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल, ग्राहक सुरक्षा और डिजिटल तरीके से पॉलिसी बेचने से जुड़े कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। बाजार को आशंका है कि इन बदलावों से कुछ कंपनियों की कमीशन आधारित कमाई, मार्जिन और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, ये अभी प्रस्ताव हैं और अंतिम नियम नहीं हैं।

आखिर प्रस्ताव में ऐसा क्या है?

1. कमीशन पर फिर लग सकती है सीमा

IRDAI ने लाइफ, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के आधार पर कमीशन की सीमा दोबारा तय करने का प्रस्ताव रखा है। इससे बीमा बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स और कंपनियों की कमाई की संरचना बदल सकती है। इससे पहले 2023 में कमीशन पर लागू सेगमेंट आधारित सीमाओं को हटाया गया था। अब प्रस्तावित ढांचे में कमीशन को फिर से ज्यादा व्यवस्थित तरीके से सीमित करने की बात है।

2. हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस में कमीशन पर असर

प्रस्तावित बदलावों में हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस के नए कारोबार पर मिलने वाले कमीशन को लेकर भी बदलाव हैं। बाजार विश्लेषण में इसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि कमीशन में कटौती सीधे उनकी आय को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से ऑनलाइन इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे PB Fintech और Turtlemint के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। विश्लेषकों ने कमीशन में बदलाव के असर को इन कंपनियों के कमाई मॉडल के लिए अहम बताया है।

3. लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन भुगतान का तरीका बदल सकता है

प्रस्ताव में लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन भुगतान को पॉलिसी की अवधि में ज्यादा फैलाने की दिशा में बदलाव की बात है। मौजूदा व्यवस्था में कमीशन का बड़ा हिस्सा पॉलिसी बेचने के समय या शुरुआती अवधि में मिलने की स्थिति हो सकती है। अगर भुगतान लंबे समय में फैलता है तो डिस्ट्रीब्यूशन की शुरुआती कमाई पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में इसे इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा गया।

4. बीमा कंपनियों के खर्च पर भी प्रस्ताव

IRDAI ने Expense of Management यानी EoM को भी तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव में जनरल इंश्योरेंस के लिए EoM सीमा को पांच साल की अवधि में GWP के 30% से घरेलू GDPI के 20% तक लाने की बात बताई गई है। इस बदलाव का उद्देश्य बीमा कारोबार में खर्च और डिस्ट्रीब्यूशन लागत को नियंत्रित करना है। बाजार की चिंता यह है कि इससे कुछ कंपनियों के खर्च और कमाई के समीकरण में बदलाव आ सकता है।

लोन के साथ जबरन इंश्योरेंस बेचने पर भी रोक का प्रस्ताव

प्रस्ताव में बैंकों और NBFCs को लोन के साथ इंश्योरेंस को अनिवार्य करने से रोकने की बात भी शामिल है। इससे उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों की इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से होने वाली फीस आय पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। यानी बदलाव का असर केवल बीमा कंपनियों या इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रह सकता। बैंक और NBFC भी प्रभावित हो सकते हैं, अगर उनकी आय में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन फीस की बड़ी हिस्सेदारी है।

डार्क पैटर्न पर भी सख्ती

IRDAI ने इंश्योरेंस की डिजिटल बिक्री में डार्क पैटर्न पर रोक का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब ऐसे डिजाइन या तरीके हैं, जिनसे ग्राहक को किसी खास विकल्प की ओर भ्रमित या मजबूर किया जा सकता है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को पॉलिसी की कीमत और दूसरी जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से मिले और वह बिना भ्रामक प्रक्रिया के अपना विकल्प चुन सके।

सरकार और नियामक बदलाव क्यों चाहते हैं?

प्रस्ताव के पीछे बताए गए प्रमुख उद्देश्य हैं

  • इंश्योरेंस की बिक्री में मिस-सेलिंग कम करना।
  • इंश्योरेंस की लागत को नियंत्रित करना।
  • ग्राहक को यह स्पष्ट जानकारी देना कि उसका पैसा किसे और क्यों जा रहा है।
  • बैंक से लोन लेते समय जबरन इंश्योरेंस बेचने की शिकायतों पर रोक लगाना।
  • इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन की लागत और कमीशन व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाना।

IRDAI का मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण ढांचा भी शिकायतों और पॉलिसीधारकों की सुरक्षा पर जोर देता है। उसके Bima Bharosa प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसीधारक शिकायत दर्ज और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकते हैं।

शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

बाजार की चिंता मुख्य रूप से भविष्य की कमाई को लेकर है। अगर कमीशन कम होता है और डिस्ट्रीब्यूशन से होने वाली फीस आय पर सीमा आती है तो कंपनियों के राजस्व और मार्जिन पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण निवेशकों ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े शेयरों में बिकवाली की। PB Fintech पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। Reuters के मुताबिक 24 सितंबर को कंपनी के शेयर में 36% की गिरावट आई। Business Standard ने भी PB Fintech में 36% और Turtlemint में 20% की गिरावट की रिपोर्ट की। HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे शेयर भी दबाव में रहे। 24 सितंबर की शुरुआती ट्रेडिंग में HDFC Life और ICICI Prudential Life में तेज गिरावट दर्ज की गई थी।

जुलाई में भी सामने आया था कमीशन बदलाव का मुद्दा

कमीशन व्यवस्था में बदलाव को लेकर चर्चा जुलाई में भी सामने आई थी। उस समय रिपोर्टों में कहा गया था कि IRDAI बड़े अपफ्रंट कमीशन को कम करने और भुगतान को पॉलिसी की अवधि में फैलाने पर विचार कर रहा है। अब सितंबर में जारी कंसल्टेशन पेपर के बाद यह मुद्दा फिर बाजार के केंद्र में आ गया है। हालांकि, अंतिम नियम आने तक प्रस्ताव में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

5 FAQs

1. PB Fintech के शेयर क्यों गिरे?
IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े प्रस्ताव के बाद बाजार में कंपनी की कमीशन आधारित कमाई और भविष्य की आय पर असर की आशंका बनी। 24 सितंबर को PB Fintech के शेयर में 36% तक की गिरावट रिपोर्ट हुई।

2. IRDAI के प्रस्ताव में कमीशन को लेकर क्या बदलाव है?
प्रस्ताव में लाइफ, हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के आधार पर कमीशन की सीमा तय करने की बात है।

3. EoM क्या है?
EoM यानी Expense of Management। यह बीमा कंपनी के कारोबार को चलाने और संबंधित खर्चों से जुड़ा नियामकीय ढांचा है। IRDAI ने इसकी सीमा को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा है।

4. डार्क पैटर्न क्या होता है?
डार्क पैटर्न ऐसे डिजाइन या प्रक्रिया को कहा जाता है, जिससे ग्राहक को किसी खास विकल्प की ओर भ्रमित या प्रभावित किया जा सकता है। IRDAI ने इंश्योरेंस में ऐसे तरीकों पर रोक का प्रस्ताव रखा है।

5. क्या IRDAI के ये बदलाव अभी लागू हो गए हैं?
नहीं। ये प्रस्ताव कंसल्टेशन पेपर के स्तर पर हैं। अंतिम नियम और उनकी लागू होने की स्थिति अलग हो सकती है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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