भाजपा के घोषणा पत्र में किसान और राष्टÑीय सुरक्षा पर जोर


नई दिल्ली। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया। इसमें एयरस्ट्राइक और सेना को फ्रीहैंण्ड देने का जिक्र किया गया है। तो वहीं आजादी के 75 साल पूरे होने पर फोकस किया गया है। इसको संकल्पित भारत, सशक्त भारत का नाम दिया गया है। इसमें 75 संकल्पों को रखा गया है।

पिछले 5 साल का लेखाजोखा:

इससे एक बात तो साफ हो गई कि इस बार भाजपा का चुनावी मुद्दा किसान और राष्टÑीय सुरक्षा ही रहेगा। इसके साथ ही साथ कुछ लोगों ने इसको भाजपा के पिछले पांच साल के कामकाज का लेखाजोखा बता रहे हैं।
पार्टी युवाओं के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर भी कई ऐलान कर सकती है। सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण की पहल को भी जोर-शोर से उठाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि भाजपा घोषणापत्र जारी के करने के साथ बीते पांच साल के कामकाज की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पेश कर सकती है। रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की रूपरेखा भी सामने रखेगी।

शाह ने गिनाईं मोदी सरकार की खूबियां :

घोषणा पत्र जारी होने से पहले अमित शाह ने कहा- 2014 से 2019 की यात्रा का जब भी इतिहास लिखा जाएगा तब यह पांच साल स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। इन पांच सालों में भाजपा ने एक निर्णायक सरकार देने का काम किया गया। 50 करोड़ गरीबों को उठाने के लिए काम हुआ है। मोदीजी की सरकार ने जरूरतमंदों तक गैस सिलेंडर, बिजली, घर, स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का सफल प्रयास किया। देश की अर्थव्यवस्था के बारे में पूरी दुनिया को सोचना पड़े ऐसा काम मोदी सरकार ने किया है। हमारी अर्थव्यवस्था 2014 में ग्यारहवें नंबर पर थी। आज छठवें स्थान पर पहुंच गए हम और तेजी से पांचवें स्थान की तरफ बढ़ रहे हैं।

मंच पर 7 नेता, आडवाणी-जोशी गायब:

संकल्प पत्र जारी करने के मौके पर भाजपा के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अलावा घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, थावरचंद गहलोत और रामलाल मौजूद थे। लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेता मंच पर नहीं थे। 2014 और इससे पहले लगभग हर मौकों पर इन दोनों नेताओं की मौजूदगी में ही भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इस बार तमाम महिला नेत्रियों ने भी पार्टी से दूरी बना रखी है। इनमें उमा भारती, सुमित्रा महाजन, खुद सुषमा स्वराज जैसी नेत्रियां शामिल हैं। इन लोगों ने घोषणा कर दी कि वे इस बार का चुनाव नहीं लडेंÞगी। तो वहीं लालकृष्ण आडवाणी की सीट गांधीनगर से खुद अमित शाह भाग्य आजमा रहे हैं।

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