बस्तर-सरगुजा में भूपेश बघेल ने बनाया बैलेंस, अब आगे होगी अग्नि परीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को आज उसका पहला आदिवासी अध्यक्ष मिल गया। मोहन मरकाम के नाम की घोषणा वेणुगोपाल ने की। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बघेल के योगदान की तारीफ भी की। सीएम भूपेश बघेल ने बस्तर और सरगुजा को बैलेंस करने के लिए तत्काल सीतापुर से चार बार विधायक रहे अमरजीत सिंह भगत को मंत्री पद थमा दिया। भूपेश बघेल सियासत के पक्के खिलाड़ी हैं, उनको यह पता है कि कब कहां कौन सा हथौड़ा मारना है। यही कारण है कि दोनों ही नेता खुश हो गए।
पहली बार आदिवासी नेता को कमान : मरकाम
विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि बस्तर के आदिवासी को पहली बार कांग्रेस ने प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है। इस जिम्मेदारी को हम बखूबी निभाएंगे। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बाद भी बस्तर के कोंडागांव विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी को बारह हजार से ज्यादा वोटों से लीड मिली थी। पार्टी के संघर्ष में मैं साथ रहा हूं, सत्ता और संगठन के साथ मिलकर काम करूंगा।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा में मैंने अपनी बात रखी थी। उन्होंने मुझपर भरोसा जताया। प्रदेश के सभी बड़े नेताओं ने मेरा साथ दिया। संगठन को मजबूत बनाने के लिए बूथ स्तर पर काम करूंगा। बस्तर में आंदोलनरत आदिवासियों को कांग्रेस के पक्ष में करने का काम किया जाएगा।
सरगुजा का तीसरा चेहरा होंगे भगत:
सीतापुर से चार बार के लगातार विधायक अमरजीत सिंह सरगुजा से टीएस सिंहदेव और प्रेमसाय सिंह टेकाम के बाद तीसरे चेहरे होंगे, जिन्हें सरकार में शामिल किया जा रहा है। प्रदेश में सरकार के गठन के छह माह बाद मंत्रीमंडल का विस्तार होने जा रहा है।
पीसीसी चीफ के लिए अमरजीत सिंह का नाम चर्चा में था विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद दिसंबर में बने मंत्रिमंडल में एक पद रिक्त था। इस पर अमरजीत सिंह भगत को मौका देने का निर्णय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिया। पहले अमरजीत सिंह भगत को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने बस्तर से नेता चुनने की बात कही। जिसके बाद शुक्रवार को आदिवासी नेता और कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम को पीसीसी अध्यक्ष बनाया गया है।
जल्दी ही होगी अग्नि परीक्षा भी:
नगरीय निकाय के चुनाव भी जल्दी ही शुरू होने वाले हैं। इसमें नए प्रदेश अध्यक्ष की अग्नि परीक्षा होगी। अगर मोहन मरकाम इस चुनाव में पार्टी को बढ़त दिलाने में कामयाब हो गए तो उनकी सीट पक्की मानी जाएगी। यह भी हो सकता है कि अगर वे लक्ष्य न हासिल कर पाएं तो सीएम उनके ऊपर अनुभव न होने का रक्षा कवच पहनाकर राहुल गांधी के सामने खड़ा कर दें। ऐसे में देखना यही होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी नगरीय निकाय चुनाव में बस्तर और सरगुजा में अपनी प्रतिष्ठा कायम रख पाएगी?
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