नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 20,000 रुपए से अधिक के दान में 743 करोड़

रुपए मिले। यह राशि कांग्रेस समेत छह राष्ट्रीय दलों को प्राप्त हुई चंदे की राशि से तीन गुना अधिक है।

 

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार,31 अक्टूबर को चुनाव आयोग के सामने दायर हलफनामे में भाजपा

ने इस बात का खुलासा किया था। इस जानकारी को सोमवार को सार्वजनिक किया गया।

 

भाजपा को प्राप्त 743 करोड़ रुपए की राशि कांग्रेस सहित अन्य सभी छह राष्ट्रीय दलों को इस तरह के मिले

दान में प्राप्त संयुक्त राशि से तीन गुना अधिक है।

 

कांग्रेस को चुनावी दान में 147 करोड़ रुपए मिले हैं। यह राशि भाजपा को मिले चंदे का सिर्फ पांचवा हिस्सा ही है।

भाजपा को साल 2018-19 में सबसे ज्यादा दान प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट द्वारा दिया गया। इसने भाजपा को

357 करोड़ की राशि चंदे में दी।

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क्या है चुनावी बॉन्ड स्कीम

चुनावी बॉन्ड व्यवस्था की घोषणा सरकार ने साल 2017 के बजट में की गई थी। इस साल के बजट ने लोगों को

अपने पसंदीदा राजनीतिक दल के साथ जुड़ने का एक नया तरीका पेश किया।

 

चुनावी बॉन्ड न तो टैक्स में छूट देते हैं और न ही ब्याज कमाने का साधन हैं। इसे चुनावी फंडिंग में सुधार के

तरीके के रूप में प्रस्तावित किया गया है। निश्चित पार्टियों के लिए एक अधिसूचित बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड

जारी किए जाएंगे।

 

यदि आप किसी राजनीतिक पार्टी को दान या चंदा देने के इच्छुक हैं, तो आप इन बॉन्ड को डिजिटल रूप

से या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकते हैं। फिर आप एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को

उपहार या चंदा देने के लिए स्वतंत्र हैं।

 

बॉन्ड संभावित रूप से वाहक बॉन्ड होंगे और देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं होगी। यहां तक की

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चंदा प्राप्त कर रही पार्टी को भी दानदाता के बारे में पता नहीं चलेगा।

 

संबंधित पार्टी इन बॉन्ड को अपने बैंक खातों के माध्यम से रुपए में बदल सकती है। इसके लिए उपयोग

किए गए बैंक खाते की जानकारी चुनाव आयोग को देना अनिवार्य है।

 

बॉन्ड को एक निश्चित समय अवधि के भीतर ही बैंक में जमा किया जा सकता है। विलंब होने पर इसका

भुगतान नहीं हो सकता। इन बॉन्ड में भुगतान होने की समय सीमा निश्चित होती है।

 

केवल भारतीय रिजर्व बैंक को ही इन बॉन्डों को जारी करने की अनुमति है, जिन्हें अधिसूचित बैंकों

के माध्यम से बेचा जा रहा है।

 

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