रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की 10 एकड़ जमीन को कृषि विभाग की अनुशंसा पर आज से

6 साल पहले यानि वर्ष 2013 में बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के निर्माण के लिए संस्कृति विभाग को

दी गयी। संस्कृति विभाग ने बाकायदा अक्टूबर 2013 में इस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने हेतु

भूमिपूजन भी किया। लेकिन इसके बाद बजट के अभाव में संस्कृति विभाग ने उक्त भूमि में निर्माण

तो दूर कोई कार्य भी शुरू नहीं किया।

डम्पिंग ग्राउंड के रूप में हो रहा है जमीन का उपयोग

इतना ही नहीं संस्कृति विभाग ने पिछले 6 वर्षों में जमीन पर एक बड़ा गढ्ढा खोदकर उसे पाटना भी

मुनासिब नहीं समझा। अब आलम ये है कि ठेकेदार लम्बे अरसे से इस जमीन का उपयोग डम्पिंग

ग्राउंड के रूप में कर रहा है।

IGKV ने अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त को लिखा पत्र

इधर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविदयालय ने अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त को पत्र

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लिखकर बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के निर्माण हेतु प्रदान की गयी 10 एकड़ भूमि को

वापस दिलाने की मांग की है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविदयालय के कुलपति के अनुमोदन पर कुलसचिव की ओर से प्रेषित पत्र में

बताया गया है कि संस्कृति विभाग को सौंपी गई भूमि पर अनाधिकृत आवागमन से विश्वविद्यालय

परिसर की सुरक्षा में भी परेशानियां उत्पन्न हो रही है। इस भूमि पर छोटे बड़े पेड़ तथा जंगली

झाड़ियां उग आई है, जिससे विश्वविद्यालय के भ्रमण पर देश-विदेश से आने वाले वैज्ञानिकों

एवं जन सामान्य के सम्मुख विश्वविद्यालय की सुंदरता एवं क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

 

पत्र में आगे बताया कि वर्ष 2012 में हस्तांतरण के पूर्व इस भूमि पर विश्वविद्यालय द्वारा राज्य की

कृषि विकास हेतु महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य किया जा रहा था। वहीँ यह भी ज्ञात हुआ है कि

संस्कृति विभाग के पास इस संस्थान के निर्माण हेतु कोई बजट उपलब्ध नहीं है।

 

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के रायपुर मुख्यालय में वर्तमान में कृषि महाविद्यालय, कृषि

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अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र संचालित है। आगामी शैक्षणिक सत्र से

उद्यानिकी महाविद्यालय भी प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है।

 

विश्वविद्यालय के पास रायपुर में 166.00 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है, जिसमें से प्रक्षेत्र हेतु

कुल 90 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। इन तीनों महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्र हेतु

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मापदंडो के अनुसार कुल प्रक्षेत्र भूमि 110.00 हेक्टेयर

आवश्यक होती है।

 

इसके अतिरिक्त रायपुर मुख्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 36 अखिल

भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना तथा भारत सरकार एवं राज्य शासन की 100

से अधिक तदर्थ अनुसंधान परियोजना संचालित है, जिसके लिए भूमि कम पड़ रही है।

संस्कृति विभाग को भेजे गए 3 पत्र में से एक का जवाब भी नहीं मिला

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान के निर्माण हेतु प्रदान

की गई 10 एकड़ भूमि को वापस करने हेतु छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग को 3 पत्र

प्रेषित किए गए हैं। जिस पर संस्कृति विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अतः

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अनुरोध है कि उक्त भूमि को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर को वापस दिलाने

का कष्ट करें।

 

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