नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में वरुण गांधी इकलौते ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने पिछले 9 सालों से वेतन के

नाम पर एक भी पैसा नहीं लिया। उन्होंने सिर्फ खुद ही वेतन नहीं लिया, बल्कि उन्होंने पूरे देश के करोड़पति

सांसदों से अपने अपने वेतन गरीबों के लिए छोड़ने की बात कही थी।

 

उनका मानना है कि राजनीति पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि राजनीति सेवा करने का साधन और

रास्ता है। उनका मानना है कि यहां से बड़ी सेवा की जा सकती है। जरुरतमंद लोगों को मदद की जा सकती है।

 

लाभार्थी ने खुद बताया फेसबुक पर :

वरुण गांधी ने राम जी गुप्ता नामक व्यक्ति को अपने तीन महीने की सैलरी से 2.50 लाख रुपये की मदद की है।

रामजी ने खुद फेसबुक पर यह बात बताई है। उन्होंने लिखा है की मेरे पापा कैंसर से लड़ रहे हैं और ऐसे में

वरुण भैया (सांसद वरुण गांधी) ने लाखों रूपये की मदद की है। लाभार्थी ने वरुण गांधी को दिल से धन्यवाद दिया है।

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28 गरीबों के लिए बनवाया घर :

सांसद वरुण गांधी समय-समय पर अपने संसदीय क्षेत्र आते जाते रहते हैं। लोकसभा में पिछले दिनों इन्होंने

28 गरीबों के लिए घर भी बनवाया था। उनका कहना है कि देश के किसान और जवान दोनों स्वस्थ

होने चाहिए। हर लिहाज से उनकी परेशानी दूर होनी चाहिए। इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तापुर के एक

किसान को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई थी. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी सांसद

13 जिलों के जरूरतमंद किसानों को मदद पहुंचा चुके हैं. सुल्तानपुर में वह दो दर्जन गरीब लोगों का घर

भी अपने पैसों से बनवा चुके हैं.

 

अमीर सांसद छोड़ें अपना वेतन :

वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपील की थी कि आर्थिक रूप

से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में वरुण गांधी ने कहा था कि भारत में असमानता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

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भारत में एक प्रतिशत अमीर लोग देश की कुल संपदा के 60 प्रतिशत के मालिक हैं। भारत में 84 अरबपतियों

के पास देश की 70 प्रतिशत संपदा है। यह खाई हमारे लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।

 

उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘स्पीकर महोदया से मेरा निवेदन है कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं

लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें। ऐसी स्वैच्छिक पहल से हम

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता को लेकर देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

 

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