नई दिल्ली/रायपुर। केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा है।

मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो क्योंकि लॉकडाउन जारी है।

केंद्र की ओर से सूचना प्रसारण मंत्रालय ने एक नोट जारी करके कहा है कि कैबिनेट सचिव और गृह मंत्रालय राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ सतत संपर्क में है।

कल शाम और आज सुबह कैबिनेट सचिव और गृह सचिव ने राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग की। केंद्र ने अपने निर्देश में कहा है कि कलेक्टर और एसपी व्यक्तिगत तौर पर इन निर्देशों को का पालन करने के लिए जवाबदेह हैं।

राज्यो से कहा गया है कि प्रवासी मजदूरों समेत गरीब और जरूरतमंद लोगों के खाने और रहने की पर्याप्त इंतजाम उन जगहों पर किया जाए जहां पर वह काम कर रहे हैं।

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इस काम के लिए एसडीआरएफ फंड के इस्तेमाल के निर्देश कल जारी किए हैं केंद्र का कहना है कि राज्यो के पास इस मद में पर्याप्त राशि है।

राज्य को यह भी कहा गया है की मजदूरों को उनके कार्य स्थल पर लाक डाउन उनके दौरान बिना किसी कटौती के समय से मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

इस दौरान मजदूरों से मकान का किराया नहीं मांगा जाना चाहिए अगर लेबर या स्टूडेंट से मकान खाली करने को कहा जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

केंद्र ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति लॉक डाउन का उल्लंघन करते हुए यात्रा करता है तो उसे सरकारी क्वॉरेंटाइन में 14 दिन तक रखा जाएगा। ऐसे लोगों की क्वॉरेंटाइन करने संबंधी विस्तार से निर्देश राज्यों को जारी कर दिए गए हैं।

केंद्र ने कहा है कि ये समझना पड़ेगा कि सभी राज्यों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करना कोरोनावायरस के फैलाव को रोकने के लिए जरूरी है और सभी के हित में भी।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है। निर्देश जारी किए गए हैं कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए।

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” राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो। केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए।

राज्यों को उनलोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है, जो छात्रों अथवा मजदूरों से जगह खाली करने को कहता है।

अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है। अधिकारी ने बताया कि प्रवासी कामगारों सहित जरूरतमंद और गरीब लोगों को खाना और आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया भर में महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से निर्णायक लड़ाई के लिए 24 मार्च की आधी रात से समूचे देश में 21 दिन के लॉकडाउन और 15 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी।

पीएम मोदी ने देशवासियों से हाथ जोड़कर विनती की कि वे अपने घर से बाहर बिल्कुल न निकलें क्योंकि इस जानलेवा वायरस के संक्रमण की श्रंखला को तोड़ने का यही एक मात्र रास्ता है।

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वहीं, प्रवासी मजदूरों के लिए शनिवार (28 मार्च) को सीमित संख्या में बस चलाने के उत्तर प्रदेश प्रशासन के फैसले के बाद अपने घर पहुंचने की जल्दी में बसों में सीट के लिए झगड़ा करते मजदूरों से दिल्ली-गाजियाबाद सीमा पूरी तरह पटी नजर आई जहां अफरातफरी और भगदड़ जैसे हालात बने हुए थे।

केंद्र का राज्यों को निर्देश

* प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील की जाएं।

* गरीब, जरूरतमंद लोगों, दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएं।

* राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि लॉकडाउन के दौरान राजमार्गों या शहरों में लोगों की आवाजाही नहीं हो।

* इन निर्देशों का पालन कराने के लिए डीएम, एसपी को निजी तौर पर जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए।

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