‘नमस्‍ते’ हो या COVID-19 की ‘दवा’ के लिए भारत की ओर देख रहे दुनियाभर के देश

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में जारी है। दिनोंदिन मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर भारत पर टिक गई है।

कभी सांप-संपेरों का देश कहकर पूरा पश्चिमी देश मजाक उड़ाते थे। आज ‘नमस्‍ते’ हो या COVID-19 की ‘दवा’ कोरोना काल में भारत के आगे पूरी दुनिया यूं नतमस्‍तक है । 90 के दशक का वो दौर याद कीजिए जब बड़ी संख्‍या में भारतीयों ने पश्चिमी देशों का रुख किया।

तब ये धारणा बनी कि भारत का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर उतना मजबूत नहीं जो महामारियों को झेल सके। कॉलरा, टीबी, स्‍मॉलपॉक्‍स के अनुभव इस धारणा को मजबूत करते गए।

वहीं उस दौर में मिडिल मिडल क्‍लास के बीच विदेश से लौटना, खासतौर से अमेरिका या ब्रिटेन से, बड़े गर्व की बात होती थी। शायद वक्‍त बदल गया है, अब वहां से लौटने वाले दिखावा नहीं करते क्‍योंकि कोरोना वायरस का प्रकोप है।

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अमेरिका ने जैसा बोया वैसा काटा

कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा बुरा हाल इस वक्‍त अमेरिका का है। साल 1892 में जब कॉलरा फैला तो अमेरिका ने सभी इमिग्रेंट्स को सीधे क्‍वारंटीन में भेज दिया। आज यही अमेरिकंस के साथ हो रहा है।

अमेरिका ने राष्‍ट्रपति भारत से मदद मांगते हैं। उन्‍हें COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में ‘गेमचेंजर’ बताई जा रही दवा Hydroxychloroquine चाहिए। भारत इसका सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। कई और विकसित देशों ने भारत से ये दवा मांगी है।

कभी उड़ाते थे मजाक, आज नतमस्‍तक

समय का अजीब खेल है। कभी भारत को ‘सपेरों का देश’ कहते थे। यहां की संस्‍कृति, इसकी सभ्‍यता का पश्चिमी देशों में खूब मजाक बनता था। आज वही देश भारत के आगे नतमस्‍तक हैं। हमारे अभिवादन के तरीके को कोरोना काल में पूरी दुनिया अपना रही है।

इजरायल, ब्रिटेन जैसे देशों के नेता खुलकर ‘नमस्‍ते’ करते हैं। हाथ मिलाने पर वायरस संक्रमण का खतरा है, इसलिए नमस्‍ते सबसे अच्‍छा। यह बात अब जाकर पश्चिमी देशों को समझ आई है।

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सीखे नहीं, झेला नुकसान

कोरोना वायरस को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के रेस्‍पांस को देखिए। दोनों देशों ने COVID-19 को हल्‍के में लिया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ये अफवाह है और जादू की तरह गायब हो जाएगा।

एक तरफ, भारत समेत एशिया के कई देश लॉकडाउन की ओर बढ़ रहे थे तो पश्चिम में व्‍यापारी जारी था। अब अमेरिका और ब्रिटेन, दोनों देशों में मरने वालों की संख्‍या हजारों में है। खुद ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन अभी ICU से बाहर आए हैं।

भारत की हर तरफ से तारीफ

वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भारत के COVID-19 पर रेस्‍पांस की तारीफ की है। जिस तरह भारत ने फैसले किए और उन्‍हें धरातल पर लागू किया, उससे दुनिया के कई देशों ने सबक लिया।

यूनाइटेड नेशंस ने कहा कि भारत में लॉकडाउन बेहद सही और सटीक समय पर लिया गया फैसला है। ब्राजील के राष्‍ट्रपति जेयर बोलसोनारो ने तो भारत को ‘हनुमान’ की संज्ञा दी।

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अब सुधर जाएं तो बेहतर

भारत में विदेशियों को खूब सम्‍मान मिलता रहा है। ‘अतिथि देवो भव’ हमारी परंपरा का हिस्‍सा है। मगर आज उन विदेशियों को शक की नजर से देखा जा रहा है। डर है कहीं वे कोरोना वायरस लेकर ना आए हों।

सच बात तो ये है कि भारत लंबे वक्‍त से अमेरिका जैसे देशों का सहयोग चाहता रहा है, मगर वैसा ही उधर से देखने को नहीं मिला। मगर ये वक्‍त इन बातों का नहीं है।

ये वक्‍त तो दुखों को साझा करने का है। बस एक उम्‍मीद है कि जब दुनिया इस महामारी से उबरे तो इससे मिले सबक जरूर याद रखे।

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