नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति ने अब नया मोड़ ले लिया है। चीन के फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर्स की सीमा पर हलचल तेज होने के बाद इंडियन आर्मी ने भी अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को यहां तैनात कर दिया है। सेना ने अपनी ‘आकाश’ मिसाइलें भी यहां भेज दी हैं जो किसी भी तेज रफ्तार एयरक्राफ्ट या ड्रोन को सेकेंड्स में खाक कर सकती हैं। सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका भी चीन के मंसूबों को समझ चुका है और उसने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनाती शुरू कर दी है। ऐसे हालात में भले ही ड्रैगन शक्ति प्रदर्शन करते हुए भारत समेत पूरी दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा हो, भारत के पास कुछ ऐसे हथियार हैं जिनसे मिनटों में ही चीन को धूल चटाई जा सकती है।
जानें कौन कौन से हथियार

न्यूक्लियर डिटरेंट ले जाने में सक्षम है अग्नि-5

भारत का सबसे खतरनाक हथियार न्यूक्लियर डिटरेंट अग्नि-5 मिसाइल सिस्टम। 5,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाला ये मिसाइल सिस्टम परमाणु हथियार ले जा सकता है। अग्नि 5 कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी मारक क्षमता के दायरे में पूरा चीन आता है। यानी अगर भारत ने अग्नि-5 का इस्तेमाल किया तो चीन के किसी भी इलाके को टार्गेट किया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिसाइल से पेइचिंग, शंघाई, गुआंगझाऊ और हॉन्ग कॉन्ग जैसे शहरों को निशाना बनाया जा सकता है। चीन के ये शहर राजनीतिक और औद्योगिक नजरिए से बेहद खास हैं और अग्नि-5 समेत भारत की मिसालों अगर लद्दाख या गुवाहाटी से पूर्वोतर इलाके से दागी गईं तो ये पूरी तरह से तबाह हो सकते हैं। चीन के ये शहर राजनीतिक और औद्योगिक नजरिए से बेहद खास हैं और अग्नि-5 समेत भारत की मिसालों अगर लद्दाख या गुवाहाटी से पूर्वोतर इलाके से दागी गईं तो ये पूरी तरह से तबाह हो सकते हैं।

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अग्नि-5 का पहला टेस्ट 2012 में किया गया था और पूरी अग्नि सीरीज में यह सबसे आधुनिक हथियार है जिसमें नेविगेशन के लिए मॉडर्न टेक्नॉलजीज हैं और परमाणु हथियार ले जाने की इसकी क्षमता दूसरी मिसाइल प्रणालियों से कहीं ज्यादा बेहतर है। इस समय अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और नॉर्थ कोरिया के पास ही इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स हैं।

जाने कितनी घातक हैं अग्नि सीरिज की अन्य मिसाइलें

अग्नि-1

अग्नि सीरीज की इससे पहले की मिसाइल्स में से अग्नि-1 बैलिस्टिक मिसाइल 700-1200 किलोमीटर की दूरी तक अपने लक्ष्य को भेद सकती है। इसे 2004 में सबसे पहले सेवा में लाया गया था। जमीन से जमीन पर वार करने वाली इस सिंगल-स्टेज मिसाइल को सॉलिड प्रॉपलैंट्स से बनाया गया है और यह एक टन पेलोड ले जा सकती है। इसके पेलोड अगर घटा दिया जाए तो इसकी रेंज को बढ़ाया जा सकता है।

अग्नि-2

2,000 किलोमीटर तक की रेंज में सतह से सतह दुश्मन को मार गिराने में ताकत रखने वाली अग्नि-2 बलिस्टिक मिसाइल भी न्यूक्लियर हथियारों को ले जाने में सक्षम है। खास बात यह है कि इस मिसाइल की रेंज को जरूरत पड़ने पर 3,000 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। यह मिसाइल भी चीन के पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों को अपनी जद में ले सकती है। 20 मीटर लंबी दो लेवल की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण वजन 17 टन है और यह 2000 किलोमीटर की दूरी तक 1000 किलोग्राम का पेलोड लेकर जा सकती है। यही नहीं, यह मिसाइल आधुनिक सटीक नौवहन सिस्टम से लैस है।

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​अग्नि-3

मिसाइल मध्यम दूरी तक मार करने वाली है और इसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है। इसकी लंबाई 17 मीटर, व्यास 2 मीटर और वजन करीब 50 टन है। इसमें 2 स्टेज का propellent सिस्टम है और यह 1.5 टन के हथियार को ले जाने में सक्षम है। अग्नि-3 मिसाइल हाइब्रिड नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम से लैस है। इसके अलावा इस पर अत्याधुनिक कंप्यूटर भी सेट है।

अग्नि -4

परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-4 भी सतह से सतह 4000 किमी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। यह मिसाइल में उड़ान में किसी गड़बड़ी को खुद ही सही करने के काबिल है और नैविगेशन सिस्टम से भी लैस है। अडवांस्ट एवि‍योनिक्स, फिफ्थ जनरेशन ऑनबोर्ड कंप्यूटर और डिस्ट्रिब्यूटेड आर्किटेक्चर टेक्नीक का भी इस्तेमाल किया गया है।