टीआरपी डेस्क। Long Covid : कोविड-19 को मात देने के बाद भी कुछ लोगों को काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। कुछ लोगों को कई महीनों से थकान, दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहते हैं। लोगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे लोग थोड़ी दूर चलने भर से थक जाते हैं।

क्या है Long Covid?

लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है ना ही सभी लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे दो लोगों के लक्षण बिल्कुल अलग हो सकते हैं। जिसमें अत्याधिक थकान होना एक आम लक्षण जरूर है।

लॉन्ग कोविड के लक्षण

सांस लेने में तकलीफ, लगातार रहने वाला कफ, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सरदर्द, सुनने और देखने में तकलीफ, सूंघने की शक्ति खत्म होना और और स्वाद का चला जाना जैसे लक्षण लॉन्ग कोविड में पाए जा सकते हैं। इसके अलावा दिल, फेफड़ों और किडनी को भी नुकसान हो सकता है।

Long Covid से जूझ रहे कई लोगों ने डिप्रेशन और एंग्जाइटी की शिकायतें भी की हैं। ये लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में बुरा असर डाल सकता है।

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ऐसा नहीं है कि लॉन्ग कोविड से निपटने में सिर्फ उन लोगों को समय लगता है जो इन्टेंसिव केयर में हैं। मामूली लक्षण वाले लोगों को भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। एक्सटर विश्विद्यालय के प्रोफेसर डेविड स्टर्न कहते हैं, ‘इस बात में कोई शक नहीं हैं कि लॉन्ग कोविड मौजूद है।’

कैसे होता है लॉन्ग कोविड?

रोम के एक बड़े अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए 143 लोगों पर की गई एक स्टडी अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन के एक जर्नल में छपी है। इसके मुताबिक, 87 फीसदी लोगों में दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण पाया गया। इनमें से आधे लोगों ने थकान की शिकायत की। हालांकि ऐसी स्टडी उन ही लोगों पर केंद्रित होती है जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है।

ब्रिटेन के कोविड सिप्टम ट्रैकर, जिसे 40 लाख लोग इस्तेमाल करते हैं, उसके आंकड़ों के मुताबिक 30 दिनों के बाद भी 12 फीसदी लोगों में लक्षण पाए गए। इसके अभी पब्लिश नहीं हुए डेटा के मुताबिक, दो फीसदी लोगों में 90 दिनों के बाद भी लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखे।

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क्या गंभीर कोविड होने पर ही Long Covid होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है। डबलिन में 50 फीसदी लोगों में 10 हफ्तों के बाद भी कोविड के लक्षण देखे गए। एक-तिहाई लोग अपने काम पर वापस लौट पाने में सक्षम नहीं थे। हालांकि बहुत अधिक थकान लॉन्ग कोविड का सिर्फ एक लक्षण है। उनका मामना है कि जिन लोगों को निमोनिया हो चुका है, उन्हें आगे कई तकलीफों का सामना कर पड़ सकता है, क्योंकि उनके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ा है। 

लॉन्ग कोविड क्यों हो रहा है?

इसे लेकर कई धारणाएं हैं, लेकिन कोई सटीक उत्तर अभी तक नहीं मिला है। हो सकता है कि वायरस शरीर के ज्यादातर हिस्सों से बाहर निकल चुका हो, लेकिन कुछ छोटे जगहों पर मौजूद हो सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर टिम स्पेक्टर के मुताबिक, ‘अगर लंबे समय तक दस्त हो तो आपको आंते में वायरस मिल जाए, अगर सूंघने की शक्ति बहुत दिनों के लिए चली जाए, तो हो सकता है, ये नसों में हैं, इसलिए दिक्कत हो रही है।’ 

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कोविड लोगों के मेटाबॉलिस्म में भी बदलाव ला सकता है। ऐसे केस सामने आए हैं, जहां मधुमेह के रोगियों को कोविड के बाद शुगर कंट्रोल करने में मुश्किलें बढ़ गईं। सार्स ने कई मामलों में शरीर में वसा को प्रोसेस करने के तरीके करीब 12 सालों के लिए बदल दिए। दिमाग में भी बदलाव के कुछ शुरुआती संकेत मिले हैं। कोविड खून में भी बदलाव ला सकता है। 

क्या यह असामान्य है?

वायरल जुकाम या खांसी के कारण भी थकान जैसी समस्याओं का होना आम है, कई तरह के इंफेक्शन के असर से उबरने में काफी समय लग जाता है। कुछ तरह के बुखार का असर भी शरीर पर महीनों तक रहता है।

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