टीआरपी डेस्क। कोरोना वायरस का संक्रमण देश और दुनिया में बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर के लोगों को इसकी वैक्सीन का इंतजार है। दुनिया की कई कंपनियां और शोध संस्थान वेक्सीन बनाने में लगी हुई है। इस बीच दुनिया की अग्रणी वैक्सीन निर्माता भारतीय कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट का दावा है कि कोरोना महामारी जल्दी खत्म नहीं होने वाली, बल्कि इसका संक्रमण अगले दो दशक तक होता रहेगा। कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने एक बिजनेस वेबसाइट से बातचीत में कहा है कि दुनिया में कोरोना का संक्रमण अगले 20 साल तक होता रहेगा और तबतक कोरोना वैक्सीन की जरूरत भी रहेगी। 

कोरोना वैक्सीन की जरूरत पर बातचीत करते हुए अदार पूनावाला ने कहा कि इतिहास में कभी ऐसा नहीं देखा गया है कि किसी वैक्सीन की जरूरत एक ही बार में खत्म हो गई हो। उन्होंने फ्लू, निमोनिया, पोलियो, चेचक आदि बीमारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी बीमारियों की वैक्सीन कई सालों से चल रही है, इनमें से कोई वैक्सीन अभी बंद तो नहीं हुई है। कोविड की वैक्सीन पर भी उन्होंने ऐसा ही कहा। 

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100 फीसदी आबादी का भी टीकाकरण कर दिया जाए तो भी कोविड-19 वैक्सीन की जरूरत खत्म नहीं होगी

पूनावाला ने कहा कि यदि 100 फीसदी आबादी का भी टीकाकरण कर दिया जाए तो भी कोविड-19 वैक्सीन की जरूरत खत्म नहीं होगी। उन्होंने तर्क दिया कि वैक्सीन कोई ठोस वैज्ञानिक उपाय नहीं है। यह केवल आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है। आपमें बीमारी से लड़ने की एंटीबॉडी पैदा कर सकता है। यह आपको बीमारी से बचाता है, लेकिन 100 फीसदी नहीं। 

वैक्सीन अभी तीसरे चरण के ट्रायल में और सफलता के करीब

उन्होंने कहा कि वैक्सीन 100 फीसदी मामलों में बीमारी के संक्रमण से नहीं बचा सकता। यदि 100 फीसदी लोगों को भी वैक्सीन लगा दी जाए, फिर भी इसकी जरूरत बनी रहेगी। मालूम हो कि सीरम इंडिया ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की रिसर्च पर कोविशील्ड नाम से वैक्सीन बना रही है। वैक्सीन अभी तीसरे चरण के ट्रायल में है और सफलता के करीब है।

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कोविशील्ड (Covishield) है नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन

मालूम हो कि सीरम इंस्टिट्यूट कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोध पर तैयार वैक्सीन को कोविशील्ड (Covishield) नाम से लॉन्च करने वाली है। यह नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन ( Non-Replicating Viral Vector vaccine ) है। एस्ट्राजेनेका से करार के तहत भारत में पुणे की कंपनी सीरम इसे तैयार कर रही है। यह वैक्सीन तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल ( Vaccine human trial ) से गुजर रही है।

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