भारत को मानचित्र शक्ति के तौर पर उभारने के लिए केंद्र सरकार लाएगी मैपिंग पॉलिसी में बड़े बदलाव
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टीआरपी डेस्क। हाल ही में केंद्र सरकार ने देश की मैपिंग पॉलिसी में बड़े बदलाव की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि यह बदलाव विशेष रूप से भारतीय कंपनियों के लिए किया गया है। जिससे भारतीय कंपनियों और किसानों को काफी लाभ मिलेगा।साथ ही भारत में स्टार्टअप को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की जानकारी ट्वीट के ज़रिए दी। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की नजर में नीतिगत बदलाव एक बड़ा कदम है।

डिजिटल इंडिया को मिलेगा प्रोत्साहन

नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि डिजिटल इंडिया को प्रोत्साहन और रफ्तार देने के लिए हमारी सरकार ने एक अहम फैसला किया है। जियोस्पेशल डेटा के अधिग्रहण और उत्पादन को नियंत्रित करने वाली नीतियों को उदार बनाना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए एक बड़ा कदम है।”

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पीएम मोदी ने कहा कि, “यह सुधार हमारे देश के स्टार्टअप, प्राइवेट सेक्टर, पब्लिक सेक्टर और अनुसंधान संस्थानों में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर समाधान निकालेगा। इससे रोजगार भी पैदा होंगे और आर्थिक विकास में भी तेजी आएगी।

साथ ही इस बदलाव से देश के किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे जियोस्पैशियल और रिमोट सेंसिंग डेटा की क्षमता में बढ़ोतरी होगी, जिसका फायदा किसानों को भी मिलेगा। यह सुधार भारत में व्यापार में आसानी से सुधार करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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स्टार्टअप और इनोवेशन की रुकावटों को किया जाएगा दूर

इसके बाद विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जो चीज दुनिया में आसानी से उपलब्ध है, उस पर भारत में प्रतिबंध लगाने की कोई जरूरत नहीं है। इसीलिए जिस भू-स्थानिक डेटा पर प्रतिबंध था, अब भारत में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होगा। इससे प्रशासनिक नियमों में अनावश्यक सख्ती और स्टार्टअप और इनोवेशन में आने वाली रुकावटों को भी दूर किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि वर्तमान में निर्माण से लेकर मानचित्र उद्योगों पर कई तरह की रोक है। भारतीय कंपनियों को अनुमति लेना, लाइसेंस लेना जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, लेकिन इस बदलाव से अब यह सब आसान हो जाएगा।

बदलाव के बाद किसी मंजूरी की जरूरत नहीं

मंत्रालय के अनुसार, सरकार भारत को दुनिया के मानचित्र में शक्ति के तौर पर उभरता हुआ देखना चाहती है। इसलिए यह बदलाव किया गया है, जिसके तहत भारत के अंदर डिजिटल जियोस्पैशियल डेटा और मानचित्र को जुटाने, उन्हें बनाने-तैयार करने, उनका प्रसार करने, जमा करने और पब्लिश-अपडेट करने के लिए किसी पूर्व-मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

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