टीआरपी डेस्क। नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सली छत्तीसगढ़ सरकार से शांति वार्ता को तैयार हैं। मगर उन्होंने इसके लिए कुछ शर्तें भी रखीं हैं। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के प्रवक्ता विकल्प ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शांति वार्ता के लिए तैयार होने की बात लिखी है।

नक्सली नेता विकल्प ने सशस्त्र बलों को हटाने, माओवादी संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने तथा जेलों में कैद नक्सली नेताओं को निःशर्त रिहा करने की मांग रखी है। विकल्प का बयान सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशु चौधरी द्वारा किए जा रहे दांडी मार्च के बाद आया है। अपने पत्र में विकल्प ने लिखा है कि उनकी पार्टी विगत कई सालों से यह घोषणा करती आ रही है कि उत्पीड़ित वर्ग और गरीब तबके की जनता के फायदे के लिए शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। इसके लिए सबसे पहले सरकार वार्ता के अनुकूल माहौल बनाने,संघर्ष इलाकों में सरकारी सशस्त्र बलों के कैंपों को हटाये और उन्हें उनके मूल बैरको  में लौटने तथा नक्सली संगठन पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाया जाए।

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शांति के लिए नहीं, समस्याओं के समाधान के लिए पदयात्रा करें

पत्र में आगे विकल्प ने लिखा है कि शांति के नाम पर पदयात्रा ना करें, जन समस्याओं के समाधान के लिए पदयात्रा सहित और भी कई तरीके अपनाएं,सड़क पर उतरे हुए आंदोलन का रास्ता अख्तियार करें, सिविल सोसायटी यदि शांति के प्रति ईमानदार है तो केंद्र और राज्य सरकारों से क्रांतिकारी दमन योजना समाधान को तत्काल बंद करने की सरकार से मांग करें।

सैन्य बल के खिलाफ है माओवादियों का आंदोलन, आंध्र प्रदेश में विफल हो चुकी है वार्ता माड़ सहित पूरे बस्तर संभाग में आदिवासी अंचलों में पुलिस और सैनिक व सैन्य बलों के कैंप बड़े पैमाने पर तैनात करने के खिलाफ माओवादी लंबे अरसे से आंदोलन कर रहे हैं। प्रवक्ता ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि वर्ष 2004 में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ भी वार्ता शुरू हुई थी। तब दो दौर की बातचीत के बाद सरकार ने उसे एकतरफा बंद कर दिया था। उसके बाद वर्ष 2010 में वार्ता के लिए स्वामी अग्निवेश ने पहल शुरू की मगर उन्हें धोखा देते हुए नजर बंद कर दिया गया। इन सबके बावजूद माओवादी संगठन अब भी वार्ता को तैयार हैं बशर्ते उनकी मांगे पूरी होनी चाहिए। उक्त प्रेस नोट विकल्प ने 12 मार्च को जारी किया है।

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