कोरोना
बच्चों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है कोरोना की तीसरी लहर

टीआरपी डेस्क। कोरोना की दूसरी लहर के बीच इस महामारी की तीसरी लहर आने की भी संभावना जताई जा रही है. ऐसे में लोगों के बीच एक डर का माहौल बनने लगा है. लेकिन सरकार और विशेषज्ञों की ओर से बार-बार यही अपील की जा रही है कि कोविड की गाइडलाइंस का पालन करें. तीसरी लहर की संभावना से डरने की नहीं बल्कि केवल सावधान रहने की जरूरत है.

एक्सपर्ट बताते हैं कि देश में कोरोना की तीन वैक्सीन एवलेबल हो चुकी है. अब 18 से 44 वर्ष की उम्र वाले लोगों को भी वैक्सीन लगाई जाने लगी है. सबकुछ ठीक रहा तो कुछ महीने के अंदर देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वैक्सिनेटेड हो जाएगा. लेकिन एक चिंता इस बात की है कि 18 वर्ष से कम आयु के किशोर और बच्चे इस वैक्सिनेशन से अभी वंचित हैं. यानी उनके लिए वैक्सीन एवलेबल नहीं हो पाई है.

तीसरी लहर की संभावना के बीच कहा जा रहा है कि 18 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों को यह महामारी ज्यादा शिकार बना सकती है. यानी कि उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है. इस बारे में दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) के डॉ नीरज निश्छल ने आकाशवाणी को दिए एक साक्षात्कार में बताया है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है और कैसे ध्यान रखा जाए.

तीसरी लहर के बीच कैसे सुरक्षित रहा जाए?

जब देश में कोरोना की पहली लहर थी, उसी वक्त कई देशों में दूसरी और तीसरी लहर चल रही थी, इसलिए कहीं न कहीं वैज्ञानिकों ने आशंका जताई थी. हमारे लिए सबसे अच्छी बात यह रही उसी वक्त हमारे पास मैसेज आ गया. लेकिन दिक्कत तब आई, जब हमने नियमों का पालन करना छोड़ दिया. इसलिए हम दूसरी लहर में प्रवेश कर गए हैं. अब हमने दोनों लहर देख ली है और जानते हैं कि इस बार कैसे बचा जा सकता है. हम चाहेंगे तो तीसरी लहर नहीं आने देंगे, इसलिए काफी सावधानी रखनी है. यह जरूरी ना हो कि सरकार या प्रशासन लॉकडाउन या कर्फ्यू लगाएगी तभी मानेंगे. हम खुद से सावधान रहें.

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क्या तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा असर होगा?

जिस तरह से पहली वेव में बुजुर्ग और कोमोरबिडिटी वाले लोगों पर ज्यादा प्रभाव देखने को मिला लेकिन दूसरी वेव में बुजुर्गों की बजाय 50 से कम उम्र के लोगों और युवाओं पर ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. ऐसे में संभावना जताई गई कि बुजुर्ग अभी घर के अंदर है और वैक्सीन उन्हें लग चुकी है, इसलिए वह ग्रुप कंट्रोल में है. जबकि युवाओं को ज्यादा बाहर जाना होता है और उन्हें अभी तक सिंगल डोज भी पूरी तरह से नहीं लगी है. हालांकि उम्मीद है आने वाले कुछ महीने में वे भी वैक्सीनेट हो जाएंगे. लेकिन अब जो ग्रुप बचेगा, वह 18 साल से कम वाले होंगे. इसलिए आशंका जताई जा रही है कि उन पर वायरस का प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है.

डीआरडीओ की दवा को मंजूरी दी गई है इसे कैसे देखते हैं?

DRDO की दवा का नाम 2-DG है. इसे एक लैब की सहायता से बनाया गया है. इसकी खास बात यह है कि इसे ओरल दिया जाएगा यानी पानी के साथ घोल कर यह दवा दी जाएगी. दावा किया गया है कि यह दवा मरीज के हॉस्पिटलाइजेशन के टाइम यानी भर्ती रहने की अवधि को कम करती है. साथ ही ऑक्सीजन लेवल को भी सही रखती है. हालांकि इसके बारे में अभी बहुत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उम्मीद है जल्द ही यह बाजार में आ जाएगी और तब इसका ज्यादा आकलन किया जा सकेगा.

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तीसरी लहर आने में अभी समय है, उससे पहले खानपान का कैसे ध्यान रखें?

सबसे पहले तो सेहत के लिए तरह-तरह की दवाई या तरह-तरह के सप्लीमेंट लेना अच्छा नहीं है. उसकी बजाय प्रोटीन, कैल्शियम और मिनरल्स के लिए हेल्दी खाना खाएं. उन चीजों को आहार में शामिल करें, जिसमें ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. परिवार में बच्चों को भी अपने साथ व्यस्त रखें. आजकल बच्चों को स्कूल और बाहर नहीं जाना है, तो टीवी या गेम में लगे रहते हैं. उनकी दिनचर्या बनाएं. थोड़ा शारीरिक एक्सरसाइज भी करें. जंक फूड, फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक आदि का सेवन ना करें. प्रोटीन वाले आहार ज्यादा लें.

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