यादों में मिल्खा सिंह: 1960 रोम ओलंपिक में बनाया था ऐसा रिकॉर्ड जो 40 साल बाद जाकर टूटा
यादों में मिल्खा सिंह: 1960 रोम ओलंपिक में बनाया था ऐसा रिकॉर्ड जो 40 साल बाद जाकर टूटा

टीआरपी न्यूज डेस्क। ‘फ्लाइंग सिख’ नाम से मशहूर भारत का परचम लहराने वाले महान धावक मिल्खा सिंह को कोरोना महामारी ने हमसे छीन लिया। मिल्खा सिंह कामनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे। 20 नवम्बर 1929 को जन्मे ‘फ्लाइंग सिख’ ने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था।

इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता था। 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान तोड़ा, लेकिन पदक से वंचित रह गए। इस दौरान उन्होंने ऐसा नेशनल कीर्तिमान बनाया, जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा।

यूं तो मिल्खा ने भारत के लिए कई पदक जीते हैं, लेकिन रोम ओलंपिक में उनके पदक से चूकने की कहानी लोगों को आज भी याद है। अपने करियर के दौरान उन्होंने करीब 75 रेस जीती। वह 1960 ओलंपिक में 400 मीटर की रेस में चौथे नंबर पर रहे। उन्हें 45.73 सेकंड का वक्त लगा, जो 40 साल तक नेशनल रिकॉर्ड रहा।

See also  बिग ब्रेकिंगः छत्तीसगढ़ में मिला कोरोना का पहला मरीज, लंदन से लौटा था परिवार

मिल्खा सिंह को बेहतर प्रदर्शन के लिए 1959 में पद्म अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2001 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था।

कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी

बता दें कि मिल्खा कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी थे, लेकिन बाद में कृष्णा पूनिया ने 2010 में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीते थे।

मिल्खा कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया था।

 दुनिया दीवानी थी जिसके रफ्तार की

एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतनेवाले मिल्खा सिंह की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए।

See also  उद्योगपतियों से बोले सीएम भूपेश बघेल : राज्य में वन आधारित उद्योग को हर संभव मदद देगी सरकार

मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ की उपाधि से नवाजा। इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से जाना जाने लगा।

Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ हमारे फेसबुक, ट्विटरटेलीग्राम और वॉट्सएप पर