रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को दूसरी पाली में चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कालेज के अधिग्रहण के पेश किए गए विधेयक पर सत्ता और विपक्ष में तीखी नोंकझोक हुई।

अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कालेज का विधेयक पास होने से पहले बजट आवंटन पर सवाल किया। सौरभ ने कहा कि जब चंदूलाल मेडिकल कालेज का बिल नहीं आया, तो बजट कैसे कर सकते है। निजी संपत्ति को सरकार कैसे पैसा दे सकती है।

बिल ही गलत: बृजमोहन

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बिल ही गलत है, तो खर्च कैसे मांग सकते हैं। पूरा विनियोग विधेयक ही गलत हो गया। जो चीज अस्तित्व में नहीं है, तो चर्चा कैसे हो सकती है। सरकार से गलती हुई है, उसे स्वीकार करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि जो चीज हाउस की प्रापर्टी नहीं है। उस पर चर्चा कैसे हो सकती है। पहले मंत्री का बयान आए। विधेयक को रद्द किया जाए।

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विधेयक के पक्ष में सरकार का पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछले सत्र में कहा था कि अधिग्रहण करेंगे। इसके लिए प्रावधान करेंगे। बहुत सी योजनाएं अस्तित्व में नहीं होती, लेकिन, बजट में प्रावधान किया जाता है। बृजमोहन ने कहा कि बिना अधिसूचना के मद कैसे तय हो सकता है। कोई अधिसूचना जारी हुई है क्या। मंत्री अकबर ने कहा कि अधिग्रहण की मंत्रिमंडल से मंजूरी हुई है।

कौशिक ने कहा कि ऐसा बहुत बार होता है कि जो कैबिनेट में पास हो, उसे सदन में नहीं रखा जाता है।ओबीसी आरक्षण पर भी कैबिनेट में निर्णय हुआ था, लेकिन अब तक सदन में नहीं आया।

अगर कोई नियम नहीं है, तो उसे दिखा दें: सिंहदेव

मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि प्रावधान कर सकते हैं, अगर कोई नियम नहीं है, तो उसे दिखा दें। चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कालेज में जो छात्र पढ़ रहे हैं, उनको लाभ मिलेगा। छात्रों को बना बनाया मेडिकल कालेज मिल गया। नया मेडिकल कालेज बनाने में 500-600 करोड़ और 5-6 साल लग जाता है। 2016 में शुरू हुए मेडिकल कालेज आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। लेनदारी-देनदारी में अधिग्रहण से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पहले साल में ही 150 डाक्टर मिलेंगे।

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ढाई साल के कार्यकाल में पहली बार मतविभाजन की नौबत

चर्चा के दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव दिया। बता दें कि राज्य बनने के बाद पाँचवी विधानसभा के कार्यवाही काल में यह पहला मौक़ा है जब संशोधन विधेयक पर मत विभाजन की स्थिति आ गई। संशोधन विधेयक में यह माँग थी कि, अभी मौजूद कर्मचारियों को अधिग्रहण के बाद भी रखा जाए और देनदारियों को सरकार दे। सरकार की ओर से इस संशोधन प्रस्ताव को नामंज़ूर किया गया।

ध्वनिमत के बाद विपक्ष ने मतविभाजन की माँग कर दी। मतविभाजन के बाद विधानसभा इस मसले पर तय हुआ कि संशोधन प्रस्ताव मंज़ूर हुआ या नामंज़ूर। जिसमें संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में सोलह मत जबकि विपक्ष में 56 मत पड़े, जिसके बाद संशोधन प्रस्ताव ख़ारिज होने की घोषणा की गई।

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