एनडीए की राष्ट्रपति कैंडिडट द्रौपदी मुर्मू का है गरीब किसान परिवार से नाता, जानें उनके बारे में

नई दिल्ली। झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। निर्वाचित होने पर वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी। इससे पहले वो झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उन्होंने 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

गरीब आदिवासी परिवार से रहा है नाता

ओडिशा के एक पिछड़े जिले मयूरभंज के एक गरीब आदिवासी परिवार से आने वाली द्रौपदी मुर्मू ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर, रायरंगपुर में पढ़ाया। 20 जून 1958 को जन्मी मुर्मू ने रमादेवी महिला कॉलेज भुवनेश्वर से बीए किया।

2000 में पहली बार विधायक

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत रायरंगपुर एनएसी के उपाध्यक्ष के रूप में की थी। द्रौपदी मुर्मू 2000 और 2004 के बीच रायरंगपुर से ओडिशा विधानसभा की सदस्य थीं। एक मंत्री के रूप में उन्होंने परिवहन और वाणिज्य, पशुपालन और मत्स्य पालन विभागों का कार्यभार संभाला। उन्होंने 2004 से 2009 तक ओडिशा विधानसभा में फिर से विधायक के रूप में कार्य किया।

2007 में मिला सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान

2007 में ओडिशा विधानसभा ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए ‘नीलकंठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया। उन्होंने 1979 और 1983 के बीच सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक के रूप में कार्य किया। उन्होंने भाजपा में कई संगठनात्मक पदों पर कार्य किया है और 1997 में राज्य एसटी मोर्चा की उपाध्यक्ष बनीं।

संगठन की मजबूती के लिए भी किया काम

द्रौपदी मुर्मू 2013 से 2015 तक भाजपा के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य थीं और 2010 और 2013 में मयूरभंज (पश्चिम) के भाजपा जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। 2006 और 2009 के बीच वह ओडिशा में भाजपा के एसटी मोर्चा की प्रमुख थीं। वह 2002 से 2009 तक भाजपा एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य रहीं।

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