कोरवा बच्चों की टीसी के लिए 10 हजार रूपये और बकरे की मांग, शिकायत सही निकली तो स्कूल की मान्यता की गई रद्द

जशपुर। जिले के बगीचा विकास खंड में यह अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसमें यहां के निजी विद्यालय में दाखिल बच्चों की फ़ीस पटाने में अक्षम परिजनों ने जब उसकी टीसी मांगी तो प्रबंधन ने इसके एवज में 10 हजार रूपये के साथ एक बकरा भी मांगा। मामले ने तूल पकड़ा तब जाँच की गई और स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की गई।

जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी है जारी

जशपुर जिले में अनेक निजी विद्यालय नियम कायदों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे हैं। शिकायत है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संरक्षण में ऐसे बहुत से स्कूल चल रहे हैं जो स्कूल संचालन के लिए बने गाईडलाईन का पालन ही नहीं कर रहे हैं। ऐसे ही निजी स्कूलों पर जिला प्रशासन ने कार्यवाही शुरु कर दी है। एक स्कूल के प्रबंधक द्वारा टीसी के लिए पहाड़ी कोरवा परिजनों से जब बकरे के साथ 10 हजार रुपए मांगे जाने का मामला सामने आया तो कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच टीम भेजकर मामले की जांच कराई।

मिडिया की सक्रियता से हुआ खुलासा

ये मामला जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड का है, जहाँ सेंधवार अम्बाडीपा में संचालित गुरुकुल संस्कृत विद्यालय में प्रबंधक द्वारा पहाड़ी कोरवा बच्चों के टीसी के लिए उनके परिजनों से दस हजार रुपयों के साथ एक बकरे की मांग की गई। जब मामले की जानकारी मिडिया को लगी तो स्कूल प्रबंधन से इस मामले में बात की गई तो आनन फानन में प्रबंधन से टीसी व अंकसूची बिना पैसों के देने की बात कही।

बच्चों की माँ पार्वती ने बताया कि पहले उनके दोनों बच्चे लमदरहा स्कूल में पढ़ते थे, जहाँ सीट खाली न होने के कारण उनके बच्चों का एडमिशन उन्होंने सेंधवार अम्बाडीपा में संचालित “गुरुकुल संस्कृत विद्यालय” में कराया। यहाँ गरीबी के चलते वे स्कूल की फीस नहीं भर पाए। स्कूल प्रबंधन के दबाव से वे परेशान हो गए और अपने बच्चों को यहाँ से निकालने के लिए टीसी की मांग करने लगे। जिसपर स्कूल के प्रबंधक व् प्रधान पाठक फुलेश्वर यादव ने पहाड़ी कोरवा बच्चों की मां से टीसी व अंकसूची के लिए दस हजार रूपए के साथ बकरे की मांग कर डाली। माँ पार्वती ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब है और वे अब अपने बच्चों को पंडरापाठ पहाड़ी कोरवा आश्रम में पढ़ाना चाहते हैं, पर टीसी व अंकसूची नहीं मिलने के कारण उनका एडमिशन वहां नहीं हो पा रहा है।

इस संबंध में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर रितेश अग्रवाल द्वारा मामले में जांच के आदेश देने के बाद बीईओ बगीचा द्वारा जांच कर प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा गया। शिकायत सहीं पाई गई, साथ ही भवन में पर्याप्त शिक्षण कक्षों की कमी एवं अवयवस्था पाई गई, जिसके आधार पर अशासकीय गुरुकुल संस्कृत विद्यालय सेंधवार, विकासखंड-बगीचा का सत्र 2022 – 23 की मान्यता पर एतद् द्वारा रोक लगा दी गई है। हांलाकि डीईओ के आदेश में वर्ष 2022-23 की मान्यता पर रोक लगाई गई है, जिससे सम्भावना जताई जा रही है कि पुनः इस विद्यालय के संचालन की अनुमति दी जा सकती है। सच तो यह है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल संचालन के किसी तरह की गाईडलाईन का पालन नहीं किया जा रहा है, ऐसे में उसे चलने की अनुमति पूर्व में कैसे दी गई।

बच्चों को आश्रम में कराया जा रहा दाखिल

बहरहाल प्रशासन ने दोनों छात्राओं को पंडरापाठ आश्रम में एडमिशन कराने की पहल शुरु कर दी है। वहीं निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर अब जिला प्रशासन कार्यवाही के मूड में नजर आ रहा है।

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