कोरोना हमारे बीच हमेशा रहेगा मौजूद? महामारी को लेकर वैज्ञानिकों ने किया ये बड़ा दावा
कोरोना हमारे बीच हमेशा रहेगा मौजूद? महामारी को लेकर वैज्ञानिकों ने किया ये बड़ा दावा

नेशनल डेस्क। कोरोना महामारी ने जमकर तबाही मचाई थी। लाखों की संख्या में लोगों की जान लेने वाली इस बिमारी से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल था। एक पल को तो ऐसा लगने लगा था की क्या इस बिमारी का कोई इलाज निकल पाएगा या नहीं? कोरोना की दो लहरों के बाद अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या कोरोना खत्महो गया है, या फिर कोरोना आगे और तबाही मचाएगा।

पिछले दो साल से कोरोना का कहर जारी

दुनियाभर में दो साल से ज्यादा समय तक कोविड-19 द्वारा जिंदगी के हर पहलू पर अपना असर छोड़ा गया। लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि महामारी भले ही समाप्त हो गई है, लेकिन कोविड हमारे बीच मौजूद रहेगा। भारत और दुनियाभर में संक्रमण के मामले धीरे-धीरे घट रहे हैं। बीमारी के इस वर्तमान स्वरूप में संक्रमण के मामले न तो तेजी से बढ़ रहे हैं और न ही एकदम से घट रहे हैं

कोरोना का अंत नजदीक : WHO

कोविड-19 को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किए जाने के दो साल से ज्यादा समय बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन अब यह कहने की स्थिति में है कि कोविड-19 महामारी का अंत नजदीक है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेडरोस आधानोम घेबरेसस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर कहा, ‘हमने ढाई साल एक लंबी अंधेरी सुरंग में बिताये हैं और हम अब उस सुरंग के अंत में प्रकाश की महज एक किरण देखने में कामयाब हुए हैं।

सावधानी नहीं बरती तो भुगतना पड़ सकता है अंजाम

उन्होंने कहा, ‘लेकिन अभी बहुत दूर जाना है और सुरंग अब भी अंधेरी है। यदि हमने सावधानी नहीं बरती तो आगे बहुत से अवरोध हैं जिनसे टकरा कर हम गलती कर सकते हैं।’ टेडरोस ने गत सप्ताह प्रेस वार्ता में कहा था कि महामारी के अंत को लेकर दुनिया अब बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा, ‘हम अभी वहां पहुंचे नहीं हैं लेकिन अंत नजदीक दिख रहा है।’ मेनन ने कहा, ‘यह निश्चित ही एक संकेत है कि महामारी के एक बड़े दौर का अंत हो रहा है लेकिन हमें इस पर भी ध्यान देना होगा कि इस ‘अंत’ की व्याख्या हम कैसे करते हैं।

टीकाकरण से कम हुआ कोरोना का खतरा

महामारी विशेषज्ञ रमनन लक्ष्मीनारायण ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि जब तक लोग टीका लगवा रहे हैं कोविड का खतरा कम है, इसलिए उन्हें महामारी को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। वाशिंगटन में सेंटर फॉर डिजीज डायमानिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी (सीडीडीईपी) के निदेशक लक्ष्मीनारायण ने कहा, ‘टीकाकरण और जनसंख्या के बड़े हिस्से के प्रभावित होने के कारण अस्पताल पहुंचने और मौत का खतरा कम हुआ है।