विशेष संवादाता, रायपुर

वॉल ऑफ़ करप्शन की तर्ज पर स्मार्ट सिटी के फंड को हज़म करने का दूसरा मामला सामने आया है। स्मार्ट सिटी फंड से वार्ड क्रमांक 57 पंडित भगवती चरण शुक्ल वार्ड में 2 करोड़ रुपए आधे-अधूरे सौंदर्यीकरण के नाम पर बहा दिया गया। लाखों रुपए खर्च कर सुविधा विहीन गार्डन का कांग्रेस के आला सियासतदाओं ने लोकार्पण किया, लेकिन उद्यान में हरी घास, फूल-पौधा, झूला, आराम के लिए बैठने की सुविधा तो दूर बिना साइड ऑफ़ प्लान के गार्डन बना दिया। गार्डन के नाम पर बदतर मज़ाक करने वाला ठेकेदार भी निगम का है, वार्ड में महापौर का आलीशान निवास भी है और यहां के पार्षद भी पूर्व महापौर, वर्तमान सभापति हैं जो इन सब से अनजान हैं।

स्मार्ट सिटी के फंड से हुए पैसों का ऐसा गोलमाल निगम की कार्यशैली और वार्ड में चल रहे ठेका खेल का महज़ एक नमूना है। बिना स्थल चयन, बिना निविदा, बिना गुणवत्ता वाले कार्यों का भुगतान भी होने वाला है। बैरन बाजार पीएनटी कॉलोनी की दीवार और नालियों को पाटकर लाखों रुपया खर्च कर बिना सुविधाओं के इस गार्डन का लोकार्पण राज्य सभा सांसद फूलोदेवी नेताम, महापौर एजाज़ ढेबर, सभापति-पार्षद प्रमोद दुबे, पूर्व राज्य सभा संसद चाय वर्मा की मौजूदगी में सिर्फ डेढ़ महीने पूर्व हुआ है।

सभापति के वार्ड का दूसरा अजीबो गरीब निर्माण कार्य है स्वर्गीय लक्ष्मण सथपति चौक। कटोरा तालाब सिंधी कॉलोनी स्थित कन्या स्कूल के पास आनन-फानन में निगम पार्षद ने चौक का निर्माण स्मार्ट सिटी फंड से करवाया, मूर्ति लगाने के समय धनाभाव बताकर स्वर्गीय सथपति के परिजनों को यह खर्च वहन करने का फरमान दे दिया। दो माह व्यतीत हो गए चौक बने लेकिन मूर्ति अब तक न तो परिजन लगवा पाए और न ही निगम। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या गार्डन नामकरण और चौक में मूर्ति लगाने का प्रस्ताव एमआईसी से पास करवाया भी गया है या नहीं

जिम्मेदार कहते हैं

वार्ड पार्षद से संपर्क साधा गया तो उनके वार्ड प्रतिनिधि बाकर अब्बास ने हिमाचल प्रदेश प्रवास पर होना बताया। उद्यान और चौक पर मूर्ति व नामकरण के सम्बन्ध में श्री अब्बास का कहना था यह एमआईसी से स्वीकृत होता है। ठेकेदार और जॉन कमिश्नर से बात कर लेने की सलाह देकर पुख्ता जानकारी देने में असमर्थता जताया। बाकर अब्बास का कहना था कि स्वर्गीय लक्ष्मण सथपति की प्रतिमा के आभाव में लोकार्पण रुका है उनके परिजन मूर्ति खर्च वहन कर रहे हैं। जोन 4 कमिश्नर अरुण ध्रुव के मुताबिक गार्डन का ड्रॉइंग और डिज़ाइन विकास स्मार्ट सिटी ने किया है इसलिए वे कुछ नहीं जानते। गार्डन और चौक का ठेका कार्य करने वाले इश्तियाक सिद्दीकी का कहना है जितना फंड दिया गया था वह निर्माण में खर्च हो गया। जितना कार्य बोलै गया उतना किया हूं, डिटेल तो नहीं बता पाउँगा क्योंकि भुगतान मुझे अब तक नहीं हुआ है।

सुलगते सवाल

  1. क्या नियमानुसार निविदा प्रकाशन किया गया?
  2. गार्डन और चौक का नामकरण किस बिंदु पर हुआ?
  3. एमआईसी की बैठक में और कितने नामकरण हुए ?
  4. जब नाम प्रक्रिया से तय हुआ तो मूर्ति की लागत परिजन क्यों देंगे?
  5. स्मार्ट सिटी के 2 करोड़ के फंड से वार्ड में क्या निर्माण-सौंदर्यीकरण हुआ?
  6. रोड, रास्ता, सफाई, रौशनी और निर्माण का ठेका चेहते ठेकेदारों को मिला?