बद्रीनाथधाम के कपाट आज श्रद्धालुओं के लिए बंदकर दिए गए है। आज (शनिवार) 3 बजकर 35 मिनट पर विधि विधान से बद्रीनाथ धाम शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। कपाट के बंद होने पर करीब 10 हजार तीर्थ यात्री धाम में मौजूद रहे और सभी ने बद्रीनाथ धाम की अंतिम पूजाओं में प्रतिभाग किया।

बता दे की माणा गांव की महिला मंगल दल की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए घृत कंबल (घी में भिगोया ऊन का कंबल) को भगवान बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 35 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

कपाट बंद होने के मौके पर सेना के मधुर बैंड धुनों पर तीर्थयात्री जमकर झूमे। कपाट बंद होने के बाद कुबेर और उद्धव जी की उत्सव मूर्ति डोली बामणी गांव के लिए रवाना हुई। इस वर्ष कपाट बंद होने के मौके पर ज्योतिर्माठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज भी उपस्थित रहे। साथ ही बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय भी मौजूद रहे। इस वर्ष बद्रीनाथ धाम में 17 लाख 60 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किए, जो अब तक का रिकार्ड है

इस साल गर्मियों में बद्रीनाथ धाम के कपाट 8 मई 2022 को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। बता दे की मंदिर के कपाट बंद होने से एक दिन पहले महालक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी जी का आवाह्न किया जाता है कि आप आइए और कपाट बंद होने से पूर्व भगवान के साथ विराजिए । लक्ष्मी जी का मंदिर बद्रीनाथ मंदिर के निकट है। कपाट खोलने पर लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना इसी मंदिर में होती है। इसके बाद मंदिर के कपाट खुलने पर भी बद्री जी की विशेष पूजा की जाती है। इससे पहले केदारनाथ धाम के कपाट 27 अक्टूबर 2022 को सुबह 8:30 पर बंद कर दिए गए थे। सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट 29 अक्टूबर को दोपहर 12:01 पर और श्री यमुनोत्री धाम के कपाट 27 अक्टूबर को दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त में बंद किए गए थे।