निलंबित

महासमुंद। अब तक आपने घूसखोर और जमीनों की अफरा-तफरी करने वाले पटवारियों की खबरें तो सुनी होगी, मगर एक ऐसा पटवारी भी है, जिसने कई ग्रामीणों की जमीन अपने नाम पर दर्ज कर ली। यही नहीं, पटवारी ने इलाके के राजा की भी कुछ जमीनों पर अपना नाम चढ़ा दिया। इसका खुलासा होने पर कलेक्टर के आदेश पर पटवारी को निलंबित कर दिया गया है।

महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड के पटवारी हल्का नम्बर 26 के पटवारी लीलाधर डड़सेना को पदीय दायित्वों के प्रति अवचार का दोषी मानते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बागबाहरा द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसकी विभागीय जांच भी शुरू की गई है। वहीं उसका मुख्यालय तहसील कार्यालय बागबाहरा नियत किया गया है। इस आशय का आदेश जारी किया गया है।

पूर्व पदस्थापना के दौरान की हेराफेरी

SDM द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि लीलाधर डड़सेना तत्कालीन पटवारी द्वारा हल्का नम्बर 33 कोमाखान (आश्रित ग्राम घोयनाबाहरा, घोयनाबाहरा खुर्द, लुकुपाली, कोमाखान, भालुचुंवा) एवं पटवारी हल्का नम्बर 35 (आश्रित ग्राम घोयनाबाहरा, घोयनाबाहरा खुर्द, लुकुपाली, कोमाखान, भालुचुंवा, जुनवानी खुर्द) इत्यादि गांवों में मुख्य सड़क से लगी, बस्ती से लगी बेशकीमती जमीन, शासन से प्राप्त भूमि, आदिवासी भूमि एवं अन्य भूमियों को कलेक्टर की अनुमति के बिना एवं बिना रजिस्ट्री के स्वयं एवं अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कर लिया गया है।

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मामले का ऐसे हुआ खुलासा

कुछ दिनों पूर्व ही महासमुंद जिले के पटवारी हल्का नंबर 33 कोमाखान के एक ग्रामीण ने कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर से दस्तावेजी साक्ष्य के साथ शिकायत जन चौपाल में की थी, शिकायत में बताया गया कि पटवारी हल्का में पदस्थ रहते हुए लीलाधर ने ये कारनामा किया है। लीलाधर डड़सेना द्वारा कई जमीनों को धोखाधड़ी करके अपने नाम पर चढ़ा लिया गया है। कलेक्टर ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि लीलाधर ने एक-दो नहीं बल्कि कई जमीन अपने नाम पर चढ़ा ली हैं। ऐसा ही उसने पटवारी हल्का नंबर 35 के आश्रित गांवों में किया है।

मिसाल बंदोबस्त के रिकॉर्ड की भी अनदेखी

पटवारी ने कोमाखान के आदिवासी राजा उदय सिंह की जमीन को भी नहीं छोड़ा, जबकि वे गोंड़ आदिवासी हैं, और और उनकी जमीन का मिसल बंदोबस्त के रिकॉर्ड में भी उल्लेख है। पटवारी ने उनकी जमीन भी अपने नाम चढ़ा ली है। बताया जा रहा है राजा उदय सिंह इन दिनों बीमार हैं और उनका राजधानी में इलाज चल रहा है।

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नाम एक ही, जातियां अलग-अलग..!

पटवारी लीलाधर ने ऐसी जमीनों को चुना जिनके मालिकों पता नहीं चल रहा है, या फिर सरकार से दी गई भूमि, आदिवासियों और अन्य लोगों की जमीन, जिनकी कोई पूछ-परख नहीं कर रहा था।

पटवारी ने ऑनलाइन में लीलाधर पिता मनीराम ही दर्ज किया है। वहीं कई जमीनों में जाति अनुसूचित जाति दर्ज किया है, तो कई में पिछड़ा वर्ग। शिकायत करने कलेक्टोरेट पहुंचे बलराम सिन्हा ने बताया कि नवीन तहसील कोमाखान तत्कालीन तहसील बागबाहरा के पदस्थ पटवारी लीलाधर डड़सेना तत्कालीन हल्का नंबर 33 कोमाखान में पदस्थ थे।

महासमुंद जिले में किसी पटवारी द्वारा किया गया इस तरह का यह पहला कृत्य है, जिसकी जांच के तत्काल बाद उसे निलंबित कर दिया गया, साथ ही उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

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