रायपुर। कांग्रेस के 85 वें अधिवेशन से निकले संदेश से साफ हो गया है कि पार्टी एकला चलो के बजाय गठबंधन को मजबूत आधार देते हुए सामान विचारधारा वाले क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर नेतृत्व अपने हाथ में रखने की तैयारी में है कांग्रेस ने आज विपक्ष की एकता पर नए सिरे से जोर दिया । उसने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए समान विचारधारा वाले धर्मनिरपेक्ष दलों को लामबंद होकर गठबंधन करना चाहिए । पार्टी ने एक विचार-मंथन सम्मेलन के दौरान कहा कि तीसरा मोर्चा चुनाव में केवल भाजपा की मदद करेगा ।  प्रस्ताव में कहा गया है कि धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी ताकतों की एकता कांग्रेस पार्टी के भविष्य की पहचान होगी ।


कांग्रेस को समान विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष ताकतों की पहचान करने, लामबंद करने और साथ जोड़ने के लिए बाहर जाना चाहिए. हमें धर्मनिरपेक्ष क्षेत्रीय ताकतों को शामिल करना चाहिए जो हमारी विचारधारा से सहमत हैं । आम वैचारिक आधार पर भाजपा की अगुवाई वाली राजग का मुकाबला करने के लिए एकजुट विपक्ष की तत्काल आवश्यकता है । इतना ही नहीं यह भी कहा गया है कि किसी तीसरी ताकत के उभरने से यानी तीसरे मोर्चे के उदय से भाजपा को फायदा होगा ।  

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पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी लोकसभा चुनाव के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठजोड़ करने की उम्मीद कर रही है ।  हालांकि उन्होंने साफ किया कि मौजूदा कठिन परिस्थितियों में कांग्रेस देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो सक्षम और निर्णायक नेतृत्व प्रदान कर सकती है ।


उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने देश के लोगों की सेवा की ।  जानकार मान रहे हैं कि विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस ने ऐसे समय में जोर दिया है जब क्षेत्रीय दल या तो अपने नेतृत्व के सामने कांग्रेस को झुकाना चाहते हैं या लोकसभा चुनावों के लिए तीसरे मोर्चे का विचार पेश कर रहे हैं. वैसे भी भारत राष्ट्र समिति के अध्यक्ष तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, टीएमसी प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थक व उनके दल के नेताओं ने अलग अलग मंचों से खुले तौर पर इन नेताओं को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया है ऐसे में कांग्रेस का यह प्रस्ताव विपक्षी एकजुटता पर क्या प्रभाव डालता है यह देखने वाला होगा ।

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कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि राष्ट्रीय जनाधार सिर्फ कांग्रेस पार्टी के पास है ऐसे में क्षेत्रीय क्षत्रपों को व्यवहारिक सोच के साथ भाजपा के मुकाबले के लिए एकजुटता दिखाना चाहिए ।  हालांकि अभी भी लगभग एक दर्जन राजनीतिक दलों का कांग्रेस के साथ विभिन्न राज्यों में सीधा मुकाबला है ऐसे में राष्ट्रीय स्तर एकजुटता की कल्पना आसान नहीं है ।  

क्योंकि कुछ क्षेत्रीय दलों का उदय ही कांग्रेस के विरोध के साथ हुआ है इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्व में सामुहिक विपक्षी एकजुटता टेढ़ी खीर है। बहरहाल, कांग्रेस के रूख से साफ हो गया है कि पार्टी विपक्षी दलों की एकजुटता तो चाहती है लेकिन अपने नेतृत्व और अपने शर्तों के साथ आगे बढ़ने को ही बेहतर भविष्य के रूप में देख रही है ।  हालांकि लोकसभा चुनाव में अभी लगभग एक वर्ष का समय है ऐसे में जल्दबाजी भी कुछ कहना आसान नहीं होगा ।

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