CYBER THAGI 1

रायपुर। अगर आपने अपने दोस्त या किसी परिचित पर भरोसा करके उसे अपना बैंक अकाउंट (खाता) उन्हें दे दिया है, तो हो जाइये सावधान। आपके खाते का इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए हो सकता है। छत्तीसगढ़ के अनेक इलाकों में ऐसा ही कुछ हो रहा है। यहां विशेषकर युवाओं को टारगेट करके झांसे में लेकर उनके खाते लिए जा रहे हैं और उन खातों में गलत कार्यों के पैसे का ट्रांजेक्शन हो रहा है। यह रकम भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि करोड़ों में है।

पिछले दिनों बिलासपुर में एक मामले का खुलासा हुआ था जिसमें दो युवकों ने 15 कॉलेज छात्रों को झांसे में लेकर सर्वे के नाम पर उनका खाता खुलवा दिया और खातों का ट्रांजेक्शन खुद करने लगे। काफी समय बाद छात्रों को पता चला कि उनके खातों से लगभग 50 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ है। आयकर और पुलिस विभाग की जांच शुरू हुई तब इसका खुलासा हुआ और यह भी पता चला कि खाता खुलवाने वाले दोनों युवक सट्टे का कारोबार करते हैं। पुलिस अब ठगी के शिकार युवकों की शिकायत पर FIR दर्ज कर सटोरियों की तलाश कर रही है। इस मामले में यह बात सामने आयी है कि दोनों आरोपी युवक खाते खुलवाकर देने वाले एजेंट और अपना खाता बैंक में खोलकर देने वालों को कुछ निश्चित रकम दिया करते थे, जिसके लालच में आकर कॉलेज छात्रों ने अपने बैंक खाते दे दिए। अब आयकर विभाग द्वारा इनके खातों की जांच की जा रही है।

व्यवसाय के नाम पर दिया झांसा

दूसरी कहानी बलौदा बाजार जिले के सिमगा थाना क्षेत्र की है, जहां के कुछ युवाओं को व्यवसाय करने के नाम पर झांसा देकर गांव के ही एक युवक ने उनके बैंक खाते ले लिए और 25- 25 हजार रूपये का इंवेस्टमेंट भी करा लिया। अब जाकर पता चला है कि गाँव के इन सीधे-साधे पढ़े-लिखे युवाओं के खातों में भी करोड़ों रुपयों का ट्रांजेक्शन किया गया है।

बंगाल की पुलिस पहुंची सिमगा

लगभग एक पखवाड़े पूर्व पश्चिम बंगाल के बिधाननगर थाने की पुलिस पुलिस छत्तीसगढ़ के सिमगा थाने के ग्राम कचलोन में रहने वाले संजय निषाद के घर पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि संजय के बेटे सतीश निषाद के खाते में ऑनलाइन ठगी के 26 लाख रूपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस ने इस मामले में सतीश निषाद को गिरफ्तार किया और अपने साथ बंगाल ले गई।

पायलट से की गई थी धोखाधड़ी

कोलकाता के बिधाननगर थाने में पिछले साल जुलाई में न्यू टाउन में रहने वाले दिल्ली के एक पायलट ने अपने खाते से 26.5 लाख रुपये निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, साइबर जालसाजों ने पायलट की नेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड हासिल करने में कामयाबी हासिल की और एक महीने में तीन अलग-अलग लेनदेन में पैसे चुरा लिए। इसके बाद बिधाननगर पुलिस के साइबर अपराध विभाग की एक टीम ने छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा और बलौदा बाजार के ग्राम कचलोन से सतीश कुमार निषाद (21) और रायपुर से संजय धिधवंशी (24) को गिरफ्तार किया।

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पुलिस का आरोप है कि निषाद को पायलट के खाते से पैसा मिला था और फिर उसने इसे धिधवंशी के खाते में स्थानांतरित कर दिया था। सिमगा थाने के टीआई अमित कुमार तिवारी ने TRP न्यूज़ को बताया कि यहां से गिरफ्तार करके ले जाये गए सतीश निषाद को बिधाननगर की पुलिस ने फ्रॉड के आरोप में जेल भेज दिया है। इस मामले में दूसरा शख्स संजय धिधवंशी भी रायपुर का है, जिसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका है।

सतीश के पकड़े जाने पर हुआ फ्रॉड का खुलासा

सतीश कुमार जिस कचलोन गांव का रहने वाला है, उसी गांव के नवीन कुमार साहू, उम्र 21 वर्ष पिता पवन कुमार साहू को जब सतीश के पकडे जाने का पता चला तब उसने सतीश के पिता संजय निषाद से इसके बारे में पूछा, पता चला कि गांव के ही प्रतीक मिश्रा पिता प्रियव्रत मिश्रा द्वारा सतीश को काम दिलाने का झांसा देकर उसका बैंक खाता खुलवा लिया गया और इसी खाते का इस्तेमाल प्रतीक ने गलत कार्य के लिया, जिसके चलते बंगाल की पुलिस उसे लेकर गई है।

सतीश निषाद के साथ हुई धोखाधड़ी की कहानी सुनकर नवीन कुमार साहू के हाथ-पैर फूल गए, क्योंकि प्रतीक मिश्रा ने ही उससे भी बैंक खाता खुलवाया था और उसमे लाखों का ट्रांजेक्शन किया था। नवीन कुमार ही नहीं बल्कि उसके कुछ और मित्रों ने भी अपने खाते खुलवाकर प्रतीक मिश्रा को दिए थे।

थाने में दर्ज करवाया FIR

नवीन कुमार ने धोखाधड़ी की आशंका से सिमगा थाने में प्रतीक मिश्रा पिता प्रियव्रत मिश्रा निवासी कचलोन के खिलाफ FIR दर्ज कराई। नवीन कुमार ने बताया कि गाँव के ही अपने मित्र प्रतीक मिश्रा से उसकी मुलाकात लगभग डेढ़ साल पहले हुई थी। आपसी बात-चीत मे प्रतीक मिश्रा द्वारा आपसी संबंध के चलते अपने इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट व आनाज गोदाम के व्यवसाय मे जुडने हेतु मुझे व मेरे दो मित्र श्रीनु पान्डेय व हेमंत कुमार साहु से आग्रह किया गया व उक्त व्यवसास प्रारंभ कर हमे सौंपने का वचन दिया गया। इसी तरह उसने मेरे गांव के रामकृष्ण साहू, पुनेश्वर साहू, भुपेन्द्र साहू, दुष्यंत शुक्ला, आशिष शुक्ला, रूपेश साहू, सिध्दार्थ साहू को भी व्यवसाय में जुडने हेतु षडयंत्र पूर्वक राजी कर लिया।

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नवीन कुमार ने बताया कि प्रतीक मिश्रा ने हमारे समस्त दस्तावेज एवं बैंक खातो का उपयोग कर 10 लोगो से 25-25 हजार रूपये, अर्थात 2,50,000 रूपये खातों में डलवा लिया और कहा कि सारी औपचारिकताओं के बाद वह उन्हें व्यवसाय को सौंप देगा।

लेनदेन की जानकारी होने के बावजूद की अनदेखी

TRP न्यूज़ संवाददाता ने जब इस मामले की तह में जाने के लिए नवीन कुमार साहू से जानकारी चाही तब नवीन ने बताया कि प्रतीक ने उनके खाते लगभग डेढ़ साल पहले खुलवाए। उसके लगभग तीन महीने बाद मेरे जीमेल अकाउन्ट में जब खाते से लेन देन का पता चला तब मैने एच डी एफ सी शाखा दामाखेडा में जाकर पता किया तो पता चला कि प्रतीक मिश्रा द्वारा मुझे धोखे में रखा गया और बिना हमारी अनुमति के लेन देन किया जा रहा है।

इस खुलासे के बाद नवीन साहू ने उक्त- मामले की चर्चा प्रतीक मिश्रा से की तब उसके द्वारा बताया गया कि मेरे इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का काम है। चूंकि मेरे खाते की लिमिट कम है इसलिए उनके खातों का उपयोग किया है। यह जानकर नवीन साहू ने चुप्पी साध ली। लगभग डेढ़ साल बाद जब सतीश निषाद को पकड़कर बंगाल पुलिस अपने साथ ले गई तब इनका माथा ठनका और नवीन सहित कुल 10 दोस्तों ने मामले की शिकायत सिमगा थाने में दर्ज कराई।

5 करोड़ से अधिक का हुआ लेनदेन

नवीन कुमार ने TRP न्यूज़ संवाददाता को बताया कि प्रतीक मिश्रा द्वारा किसी के खाते में 80 लाख तो किसी के में 90 लाख का ट्रांजेक्शन किया गया है। कुल मिलाकर 10 लोगों के खाते से लगभग 5 करोड़ का लेनदेन किया गया है। हालांकि नवीन और उसके दोस्तों को अब भी ठीक से नहीं पता कि उनके खातों का इस्तेमाल किस काम के लिए किये गया है।

विदेश में रहता है प्रतीक..?

ग्राम कचलोन का रहने वाला प्रतीक मिश्रा भी नवीन और उसके दोस्तों की तरह साधारण युवक की तरह जीव्वन-यापन करने वाला रहा है, मगर जब से उसके द्वारा दोस्तों के खातों से करोड़ों के लेन-देन किये जाने का खुलासा हुआ तब से लोग उसके घर पहुँचने लगे हैं। नवीन कुमार ने बताया कि जब उसने प्रतीक के घर पर जाकर उसके बारे में पूछा तब उसके पिता प्रियव्रत मिश्रा ने कहा की वह इंडोनेशिया में रहता है, वहीं बातचीत में प्रतीक की मां ने कहा कि वह तो मलेशिया में रहता है। उधर जब प्रतीक से फोन करने नवीन ने पूछा तब उसने बताया कि वह शिप में अकाउंटटेंट का काम करता है। इस तरह के गोल-मोल जवाब से पता चला कि प्रतीक अब फ्रॉड के काम में लगा हुआ है।

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उधर जब हमने संजय निषाद से उसके बेटे सतीश निषाद के बारे में पूछा तब उसे केवल इतना ही पता था कि बंगाल की पुलिस उसे अपने साथ ले गई है। वहां उसके खाते के बारे में पूछताछ की जा रही है। उसे इतना भी पता नहीं है कि उसके बेटे को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। सतीश को लेकर जाने वाले पुलिस के अधिकारियों के बारे में भी उसे कुछ भी नहीं पता। गाँव के सीधे-साधे नौजवान सतीश का दोष केवल इतना था कि उसने अपना खाता खुलवाकर प्रतीक को दे दिया था। आज वह जेल की हवा खा रहा है।

सिमगा पुलिस कर रही है जांच

सिमगा थाने के टीआई अमित कुमार तिवारी ने TRP न्यूज़ को बताया कि नवीन कुमार और उसके दोस्तों की शिकायत पर FIR दर्ज कर प्रतीक मिश्रा की खोजबीन की जा रही है, साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन सभी के खातों का किस काम में उपयोग किया जा रहा है। यह मामला काफी बड़ा है और इस बात की जानकारी ली जा रही है कि प्रतीक मिश्रा ने और कितने लोगों को झांसा देकर उनके खातों का इस्तेमाल किया है।

बहरहाल ये तय है कि ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों और सट्टे के कारोबारियों द्वारा इस तरह लोगों को धोखे में रखकर उनके खातों का इस्तेमाल काले कारोबार के लिए किया जा रहा है। इसके लिए विशेष तौर पर भोले-भले नौजवानों का इस्तेमाल किया जा रहा है और बिना कुछ किये ही उन्हें अपराधी बनाया जा रहा है। इनसे बचने के लिए बेहतर ये है कि इनके झांसे में न आएं और अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंक खाते किसी के सुपुर्द न करें।

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