जशपुर। पत्थलगांव के सरकारी अस्पताल मेंअधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा किडनी के मरीजों को भुगतना पड़ा रहा है। अस्पताल में उपलब्ध डायलिसिस मशीन के बावजूद मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे दामों पर डायलिसिस करवाना पड़ रहा है। दरअसल पत्थलगांव सिविल अस्पताल में किडनी के मरीजों के लिए लाई गई जीवनदायनी डायलिसिस मशीन बीते छह महीनों से स्टोर में पड़ी है। मरीजों के लिए सस्ते इलाज के लिए जरूरी इस उपकरण के जल्द शुभारंभ की ओर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। पत्थलगांव क्षेत्र में डायलिसिस सेवा की बढ़ती जरूरत के मद्देनजर स्थानीय लोगों ने अस्पताल में डायलिसिस मशीन की मांग उठाई थी, जिसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 6 महीने पहले करीब 32 लाख रुपए की डायलिसिस मशीन की सौगात सिविल अस्पताल को दी थी। लेकिन इस उपकरण को सीलपैक कार्टून से आज तक बाहर नहीं निकाला जा सका है।

फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन टेक्नीशियन का अभाव बताकर इस मशीन का उपयोग नहीं कर रहा है. जबकि इस मशीन को लगाने के पीछे सोच थी कि किडनी रोग से ग्रसित गरीब मरीजों को डायलिसिस की सस्ती सुविधा मिलेगी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण क्षेत्र के किडनी मरीजों को 100 किमी दूर जाकर अपना उपचार करना पड़ रहा है। पत्थलगांव खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेम्स मिंज का कहना है कि पूर्व में संजीवनी का टीम विजिट कर मशीन के बारे में जानकारी लेकर गई है। जल्दी ही इस मशीन को प्रारंभ करने का प्रयास किया जा रहा है।

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