रायपुर। पूरे प्रदेश में गणेश चतुर्थी से शुरू हुई पंडाल राजनीति का यह दौर अब दुर्गा पूजा दिवाली तक चलने वाली है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही राजनीतिक दावेदारों की धड़कने तेज होती जा रही है।

बूथ, वार्ड, मंडल के कार्यकर्ताओं को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया जा रहा है। साथ ही बूथ को जीतने का संकल्प भी दिलाया जा रहा है। अब देखना है कि भरोसा और परिवर्तन की जंग में कौन भरौसावीर और परिवर्तनवीर बनता है।

अपनी जीत पक्की करने के लिए गणेश विसर्जन से शुरू हआ रतजगा अब राजनीतिक रूप ले चुका है। रात-रात को गली-मोहल्लों नुक्कड़ों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के साथ चाय नाश्ते का दौर अल सुबह देख सकते है।

दोनोें प्रमुख पार्टियों के विधानसभा स्तरीय नेता अपने विधानसभा में भरोसा और परिवर्तन यात्रा के बाद सक्रिय हो चुके है। नेताओं की माने तो इस तैयारी को लेकर उनका कहना है कि न जाने कब चुनाव आयोग का आचार संहिता का बिगुल बज जाए।

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इसलिए सतर्क रहो, जागरूक रहो वाली नीति पर काम करने जुटे हुए ताकि रिजल्ट पाजीटिव आए। इसके साथ दोनों पार्टी के कार्यकर्ता जीत र्के दावे कर रहे हैं। सत्ताधारी पार्टी एक बार फिर चुनाव जीतने का दम भर रही है, वहीं विपक्ष सत्तादधरी दल की आखिरी कार्यकाल बता रही है। भाजपा ने 90 विधानसभा सीटों में से 21 पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सूची जारी होने का अभी इंतजार है।

रायपुर की चारों विधानसभा सीटों पर दोनों पार्टियों ने अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जिसको लेकर गली-मोहल्लोॆं में चर्चा हो रह है कि किसे टिकट मिलेगा और कौन जीतेगा इस पर जनमानस में बहस शुरू हो गया है। दावेदारों के काम का मूल्यांकन को लेकर भी सार्वजनिक स्थल चौक-चौराहों में प्रत्याशी और जीत को लेकर कयासों का दौर चल रहा है।

चारों विधानसभा क्षेत्रों में दावेदारों के अलग-अगल कार्यकर्ता और समर्थक हैं, जो अलग-अलग जगह पर रतजगा करने के लिए स्थल चयन कर महफिल सजा कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करने में जुटे हैं।

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राजनीतिक पार्टियों के दावेदार चुनाव से पहले रूठे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को मनाने की कवायद में जुटे हैं। दावेदारों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर समस्याएं पूछ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो लोग वार्ड में कभी दिखते नहीं थे, वह समस्याएं पूछकर उनका समाधान का आश्वासन दे रहे हैं।

दावेदारों ने कार्यकर्ताओं को रोजाना कितने घरों में जाना है, इसका लक्ष्य निर्धारित किया है। कार्यकर्ता भी समर्पण भाव से लक्ष्य को पूरा करने में जुटे हुए हैं। राजनीतिक पार्टियां कार्यकर्ताओं के भरोसे परिवर्तन करने के लिए एड़ी-चोटी की जोर लगा रहे है।

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