रायपुर/मुंबई। मुंबई की सांस्कृतिक शान एशियाटिक सोसायटी की 219वीं वर्षगांठ शनिवार (25 तारीख) को सोसायटी के सभागार में राज्यपाल रमेश बैस की मौजूदगी में संपन्न हुई।

राज्यपाल रमेश बैस ने इस कार्यक्रम में कहा कि लाखों दुर्लभ पुस्तकों, पांडुलिपियों, सिक्कों और मानचित्रों का संग्रह रखने वाली एशियाटिक सोसायटी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। लेकिन मुंबई दानवीरों का शहर है।

मुंबई मैराथन के माध्यम से सैकड़ों गैर-सरकारी संगठन अपने धर्मार्थ कार्यों के लिए मुंबई से धन एकत्र कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा, इसलिए, यह धन की कमी नहीं है, बल्कि सही प्रस्ताव को सही लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।

राज्यपाल ने कहा कि एशियाटिक सोसाइटी को राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, अपने भव्य परिसर को नया स्वरूप देना चाहिए और युवा पाठकों को आकर्षित करना चाहिए।

इस अवसर पर राज्यपाल ने सुझाव दिया कि हमें इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि विश्व के बड़े पुस्तकालय किस प्रकार अपने आप को बदल रहे हैं और उसके अनुरूप बदलाव कर युवा पीढ़ी एवं कॉरपोरेट सदस्यों को प्रबंधन में लें।

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