बिलासपुर। बिलासपुर संभाग में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में सर्वसुविधायुक्त सिम्स अस्पताल का निर्माण कर बड़ी संख्या में डाक्टरों की नियुक्ति की गई है। अस्पताल में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को सरकार की ओर से सैलरी दी जाती है। इसके बावजूद सिम्स के डाक्टर प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं। डॉक्टरी पेशे को आय का जरिया बनाकर प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहे डाक्टरों की लापरवाही ने सिम्स अस्पताल को बदहाल कर दिया है। सिम्स की बदहाली पर स्वतः संज्ञान याचिका पर हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान सिम्स के ओएसडी ने माना कि सिम्स के डॉक्टरों में वर्क कल्चर नहीं है। डॉक्टरों का ज्यादा ध्यान प्राइवेट प्रैक्टिस पर रहता है. हाई कोर्ट ने डीन और एमएस को व्यवस्था बनाने में असफल बताते हुए 6 दिसंबर को अगली सुनवाई निर्धारित की है। पूर्व में हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के सीनियर आईएएस आर प्रसन्ना को सिम्स के ओएसडी के रूप में काम करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

See also  यूडी मिंज-कुनकुरी विधानसभा चुनाव 2023

ओएसडी ने चीफ जस्टिस व जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डीबी में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसमें स्वीकार किया गया है कि सिम्स में वर्क कल्चर पूरी तरह प्रभावित हो गया है । इसे वापस पटरी पर लाने में अभी बहुत समय लगेगा। हाई कोर्ट ने एडवोकेट सूर्या कंवलकर डांगी, अपूर्व त्रिपाठी और संघर्ष पाण्डेय को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर सिम्स में पूरी जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था । कोर्ट कमिश्नरों ने भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की । रिपोर्ट में बताया गया कि बहुत से डॉक्टर प्रायवेट प्रैक्टिस भी करते हैं।